पंडित रोहित दुबे ने आगे कहा कि इतिहासकारों की मानें तो अर्धांगिनी से विरक्ति होने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम को समर्पित कर दिया था। राम भक्त तुलसीदास की गिनती महाकवियों में होती है। उन्होंने रामचरित मानस, हनुमान चालीसा और विनय-पत्रिका समेत कई अन्य प्रमुख रचनाएं की हैं। जीवन में गति जब तुलसी के समान होगी तभी जीवन में सब सुखों के साथ भक्ति का प्रवेश होता है वास्तविक आनंद प्रभु श्री राम के माध्यम से ही प्राप्त होता है यदि हमारा मन प्रभु से जुड़ जाएगा तो जीवन में धन्यता का प्रवेश होगा गोस्वामी तुलसीदास जी निरंतर पूर्णिमा के चंद्रमा के समान मानस पटल पर चमक रहे हैं जिस प्रकार आज चंद्रमा पर भारतीय तृतीय चंद्रयान गौरव और देश की ख्याति बढ़ा रहा है उसी प्रकार तुलसीदास जी की ख्याति भी निरंतर श्री रामचरितमानस के माध्यम से बढ़ती ही जा रही है यह सब कुछ भगवान की कृपा से ही प्राप्त होता है। इस अवसर पर तुलसीदास जी महाराज का विधिवत पूजन अर्चन किया गया एवं भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया कार्यक्रम में उपस्थित सर्वश्री भगवान दास धीरावाणी, रमेश नवेरिया, सौरभ दुबे, सुनील उपाध्याय, विराट शर्मा, बालमुकुंद दुबे, राजेश तिवारी, आदित्य शर्मा आदि की उपस्थिति रही।
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