जबलपुर. हाईकोर्ट ने पमरे के जबलपुर रेल मंडल के सिंगरौली के सरई रेलवे स्टेशन पर लंबे समय से प्लेटफार्म के एक हिस्से में कोयला और खनन सामग्री डंप किए जाने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गयी थी. याचिका में डंपिंग के कारण रेलवे स्टेशन में आने वाले यात्रियों को परेशानी होती है और प्रदूषण के कारण आसपास के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो रही है.
हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले में केंद्र सरकार और डीआरएम जबलपुर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. इसके लिये 20 अगस्त तक की मोहलत दी गई है.
कोयला और खनन सामग्री डंप किए जाने को चुनौती
सिंगरौली निवासी अधिवक्ता विजय जायसवाल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि सरई रेलवे स्टेशन पर दो प्लेटफार्म हैं. इनमें से एक तरफ लंबे समय से कोल माइंस से संबंधित कोयला और अन्य सामग्री डंप की जा रही है. इसके कारण यात्रियों को प्लेटफार्म पर खड़े होने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिलती.
धूल और कोयले के कण फैलने से श्वांस संबंधी परेशानियां
याचिका में कहा गया कि कोयला खुले में डंप किए जाने से क्षेत्र में धूल और कोयले के कण फैल रहे हैं. इसका असर स्टेशन आने वाले यात्रियों के साथ आसपास के पांच-छह गांवों के रहवासियों पर भी पड़ रहा है. प्रदूषण के कारण लोगों में श्वांस संबंधी परेशानियां बढऩे का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि रेलवे प्लेटफार्म को कोयला डंपिंग से मुक्त कराया जाए और प्रदूषण रोकने के प्रभावी उपाय किए जाएं. सुनवाई के बाद युगलपीठ ने केंद्र सरकार और डीआरएम जबलपुर को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिया है. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता एसके कश्यप ने पैरवी की.
