जबलपुर में रेरा नियमों की अनदेखी कर 121 प्रोजेक्ट्स में बेचे जा रहे अवैध प्लॉट
जबलपुर। जिले में रियल एस्टेट कारोबार के भीतर रेरा पंजीयन के नाम पर आम लोगों को गुमराह कर अवैध कॉलोनियों का बड़ा जाल फैलाया जा रहा है। रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर जिले के करीब 300 प्रोजेक्ट दर्ज हैं, जिनमें से केवल 10 प्रोजेक्ट को ही अंतिम पंजीयन की मंजूरी मिल पाई है। शेष 121 ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनके आवेदन लंबे समय से लंबित हैं। इसके बावजूद कॉलोनाइजर केवल आवेदन संख्या के आधार पर जमीनों की अवैध बिक्री कर रहे हैं। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, जिनकी कलेक्ट्रेट कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है। वहीं नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने हाई कोर्ट के आदेश पर 5 कॉलोनियों सहित अन्य प्रोजेक्ट्स की जांच हेतु अपर आयुक्त के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित किए हैं, जो टीएनसीपी और रेरा की स्थिति का सत्यापन कर रहे हैं।
केवल आवेदन संख्या दिखाकर जमीनों का अवैध कारोबार
प्रोजेक्ट का आवेदन करने और रेरा पंजीयन प्रमाण पत्र हासिल होने में बुनियादी अंतर होता है। नियम के अनुसार जब तक किसी परियोजना को सक्षम प्राधिकारी से अंतिम पंजीयन प्रमाण पत्र जारी नहीं हो जाता, तब तक एक भी भूखंड या मकान का विक्रय नहीं किया जा सकता। इसके विपरीत शहर और ग्रामीण अंचलों में बिल्डर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से केवल नक्शा पास करवाकर रेरा में ऑनलाइन आवेदन दाखिल कर देते हैं। इसके तुरंत बाद वे पावती संख्या को ही वैध अनुमति बताकर खरीदारों को करोड़ों रुपयों के प्लॉट बेचने लगते हैं। आवेदन की स्थिति में दस्तावेजों, भूमि के मालिकाना हक और वैधानिक मापदंडों की विस्तृत जांच बाकी रहती है। अनुमति मिलने से पहले जमीन बेचना स्पष्ट रूप से गैरकानूनी है और ऐसे प्रोजेक्ट स्वतः अवैध निर्माण की श्रेणी में आ जाते हैं।
प्रशासनिक सुस्ती से तहसीलों में अटकी सख्त कार्रवाई
अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए सभी तहसीलों के अनुविभागीय अधिकारियों को मैदानी जांच और एफआईआर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बावजूद जबलपुर शहर, अधारताल, गोरखपुर, रांझी, सिहोरा, पाटन और कुंडम तहसीलों में यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में भूमाफिया के खिलाफ बड़े स्तर पर सख्त प्रशासनिक अभियान चलाए जा रहे हैं, जबकि यहां महीनों से फाइलें कलेक्ट्रेट और तहसील दफ्तरों के बीच चक्कर काट रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कदम न उठाए जाने के कारण कॉलोनाइजर बिना किसी डर के नए-नए क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं। नगर निगम की जांच टीमें अब मैदानी स्तर पर पहुंच रही हैं ताकि गैरकानूनी ढंग से विकसित हो रही बस्तियों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
खरीदार असली प्रमाणपत्र जांचकर ही करें अपनी खरीदी
अवैध कॉलोनियों का सबसे अधिक फैलाव अंधमूक बायपास से भेड़ाघाट मार्ग, अंधमूक बायपास से पाटन मार्ग, कटंगी, खजरी खिरिया, विजय नगर, धन्वंतरी नगर, बिलहरी, तिलहरी, बरगी और बरेला के आसपास देखा जा रहा है। इन क्षेत्रों में जमीन तलाश रहे ग्राहकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। किसी भी संपत्ति में निवेश करने से पहले संबंधित व्यक्ति को रेरा के पोर्टल पर जाकर प्रोजेक्ट का वास्तविक पंजीयन क्रमांक और उसकी वर्तमान स्थिति जांचनी चाहिए। केवल आवेदन रसीद को स्वीकृति न मानें, बल्कि विकासकर्ता से अधिकृत पंजीयन प्रमाण पत्र और अनुमोदित लेआउट की प्रमाणित प्रति मांगें। बिना पूर्ण वैधानिक अनुमति वाले प्रोजेक्ट में पूंजी लगाने से भविष्य में आर्थिक नुकसान और अदालती विवाद की संभावना बढ़ जाती है।
