नवोदित साहित्यकारों के काव्य पटल का लोकार्पण हुआ
जबलपुर। हरिशंकर परसाई भवन मदन महल में वर्तिका की मासिक काव्य गोष्ठी डॉ.रत्ना ओझा के मुख्य आतिथ्य, बुंदेली मर्मज्ञ पंडित दीनदयाल तिवारी की अध्यक्षता और श्रीमती मिथलेश नायक कमल के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुई। कार्यक्रम में मनोहर चौबे आकाश एवं डॉ शिवानी परोहा गौतम कुमुदी के काव्य पटल का अनावरण किया गया। अस्मिता शैली की सरस्वती वंदना से आरंभ हुए इस आयोजन में मुख्य वक्ता राजेश पाठक प्रवीण, संयोजक विजय नेमा अनुज, संचालक द्वय सुनील तोमर व आलोक पाठक सहित आभार कर्ता संतोष नेमा संतोष उपस्थित रहे। अतिथियों ने महान शिक्षाविद व लोक भाषा विज्ञानी पूरन चंद्र श्रीवास्तव के कृतित्व को याद करते हुए नई पीढ़ी को बुंदेली लेखन से जोड़ने का आह्वान किया।
श्रावण मास की मधुर कविताओं से महकी महफिल
समारोह के दूसरे सत्र में कवियों ने श्रावण मास और कजलियां पर्व पर केंद्रित रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संतोष नेमा ने सावन में गर तुम आ जाते मन मलीन पंकज खिल जाते सुनाकर वाहवाही बटोरी। डॉ शिवानी परोहा ने नारी चेतना पर हे भारत की बेटियों सुनो तो जरा उठो जागो पढो और आगे बढ़ो प्रस्तुत किया। मनोहर चौबे ने स्वप्न देख कर मुस्कराता मैं और जाग कर रोता तुम मिलकर बिछुड़े होते तो कितना अच्छा होता तथा मनोज जैन ने आ जाओ भगवान तुम्हारा निमंत्रण है का पाठ कर समां बांधा। काव्य पाठ के इस क्रम में विजेंद्र उपाध्याय, प्रकाश ठाकुर, उर्मिला श्रीवास्तव, सुशील श्रीवास्तव, विजय सिन्हा और जयप्रकाश श्रीवास्तव ने अपनी मौलिक रचनाएं प्रस्तुत कीं। इसके साथ ही ताराचंद्र कुशवाहा, कुंजीलाल चक्रवर्ती, विजय विश्वकर्मा, सुभाषमणि बैरागी, एड प्रभा खरे, विवेक गुप्ता, प्रशांत श्रीवास्तव, प्रेम कुमार पालीवाल, सुभाष जैन सलभ, प्रतिमा अखिलेश एवं कविता विश्वकर्मा ने काव्य सृजन से श्रोताओं की खूब प्रशंसा बटोरी। इस साहित्यिक समागम में आर के पासी, आशीष पाठक और श्रीमती विश्वकर्मा की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

