जबलपुर। एक साल से गुमनाम जिंदगी गुजार रही फूलमत साय को अपना घर और परिजन मिले। यह मूक-बधिर महिला को रेल पुलिस ने महिला आश्रय छोड़ा था। काफी प्रयासों के बाद भी महिला के परिजन या घर का पता नहीं चल सका। निराश महिला आश्रम में ही गुजर-बसर कर रही थी कि अचानक छत्तीसगढ़ से महिला का सुराग मिला और त्योहार पर महिला का बेटा और भतीजा पहुंच गया। परिजनों को देखकर महिला की आंखें छलछला उठी। नियमानुसार महिला को उसके परिजनों को सौंपा गया।
शक्ति सदन के संस्थापक अंशुमान शुक्ला ने बताया कि करीब एक साल पहले रेलवे पुलिस को एक ऐसी मूक-बधिर महिला मिली थी, जो न बोल सकती थी और न सुन सकती थी। महिला के पास पहचान संबंधी कोई दस्तावेज नहीं था और वह लिखना-पढ़ना भी नहीं जानती थी। भाषा और पहचान की बाधाओं के चलते उसके परिवार तक पहुंचना पुलिस और सामाजिक संस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
जानकारी के मुताबिक महिला को रेलवे पुलिस बिना टिकट लेकर आई थी। महिला ने सांकेतिक भाषा के जरिए बताया था कि वह अपनी बहू से विवाद के बाद घर से निकली है और वापस जाना चाहती है। इसके बाद महिला के परिजनों की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए गए। जानकारी विभिन्न ग्रुपों, थानों और पुलिस कंट्रोल रूम तक भेजी गई, लेकिन लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला।
इस दौरान महिला कई बार निराश होकर संस्था से चली जाती थी। हर बार उसे तलाश कर वापस लाया गया। लगातार अकेलेपन और तनाव के चलते महिला ने आत्महत्या का प्रयास तक किया। बोलने-सुनने, पढ़ने-लिखने में असमर्थता ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।
अब करीब एक साल बाद उसके परिवार का पता चल गया है। जानकारी के अनुसार महिला का गुम इंसान प्रकरण थाना उदयपुर, जिला सरगुजा में दर्ज था। अब महिला का बेटा मंगल साय और भतीजा मेघनाथ साय उसे लेने के लिए आए। बताया गया है कि परिवार जिला सूरजपुर, छत्तीसगढ़ के अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्र में रहता है और किसान परिवार से संबंधित है।
