जबलपुर। केंद्र सरकार की नई श्रम संहिताओं और बिजली कंपनियों के निजीकरण के विरोध में मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने व्यापक प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन का नेतृत्व महामंत्री राकेश डीपी पाठक, दिनेश दुबे और दीपक मेमने ने किया। इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी एवं प्रदेश अध्यक्ष श्याम सुंदर यादव के निर्देश पर हुए इस आयोजन में श्रम कानूनों को रद्द करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने तथा संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग उठाई गई। प्रदर्शन में शिवहरि श्रीवास्तव, दिलीप पाठक, दयाशंकर द्विवेदी, केदार सिंह बघेल, सी एस पालीवाल, सुषमा उपाध्याय, आरती शुक्ला, श्याम गोस्वामी, अजिता विश्वकर्मा, रुपाली, रुचि, अमृता, वैष्णवी, मानसी पांडे, अजित ठाकुर, राजू नायडू, रवि बहादुर, ललित विश्वकर्मा, राजेन्द्र चक्रवती, आशीष नाथ, सुनील अहिरवार, दिलीप विश्वकर्मा, घनश्याम पटेल और चेतन गुप्ता समेत अनेक कर्मी शामिल हुए।
निजीकरण और नए कानूनों से बढ़ेगा शोषण
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नए श्रम कानून उद्योगपतियों के पक्ष में हैं, जिससे कर्मचारियों का उत्पीड़न बढ़ेगा और श्रम संगठनों का अधिकार छीन जाएगा। पुराने 44 कानूनों को बदलकर बनाए गए नए प्रावधानों से कर्मचारियों की छंटनी और तालाबंदी आसान हो गई है। बिजली क्षेत्र में 15 सालों से कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को इस उम्र में परीक्षा के जरिए नियमित करना गलत है। संघ ने परीक्षा में न्यूनतम अंक 80 की जगह 50 निर्धारित करने और सभी को बिना शर्त नियमित करने की मांग रखी। साथ ही बिजली कंपनियों में कंपनीकरण बंद कर जनहित की रक्षा करने की बात कही।
कर्मचारियों ने मांगी पेंशन सुरक्षा गारंटी
आंदोलन के दौरान राज्य और केंद्र सरकार से पेंशनरों की पेंशन सुरक्षा की गारंटी मांगी गई। मध्य प्रदेश में नियमित कर्मचारियों के साथ पेंशनभोगियों को महंगाई राहत देने और राज्य बंटवारे की धारा 49 को समाप्त करने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त सभी श्रेणियों के कर्मियों के लिए कार्य समय 8 घंटे तय करने, कार्यस्थल पर सुरक्षा देने और सभी के लिए न्यूनतम मजदूरी 26 हजार रुपये के साथ महंगाई भत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन दयाशंकर द्विवेदी और आभार प्रदर्शन दिलीप पाठक ने किया।
