जबलपुर. एमपी के जबलपुर हाईकोर्ट ने पश्चिम मध्य रेलवे के इटारसी स्टेशन पर 4.47 लाख रुपये के कथित गबन के मामले में आरोपी चीफ बुकिंग सुपरवाइजर (सीबीएस) भावना राय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत और पूर्व निर्धारित साजिश के आरोपों में उनकी भूमिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अग्रिम जमानत प्रदान करने के पूर्व तथ्यों और जांच की जरूरतों को ध्यान में रखना आवश्यक है। रेलवे विभाग की कैश राशि का गबन गंभीर आरोप है। सोची-समझी साजिश के आरोप की जांच में याचिकाकर्ता महिला अधिकारी की भूमिका अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुई है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ महिला अधिकारी को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया।
एक साल बाद दर्ज कराई थी रिपोर्ट
याचिकाकर्ता भावना राय की तरफ से अग्रिम जमानत के लिए दायर आवेदन में कहा गया था कि वह रेलवे विभाग में चीफ बुकिंग सुपरवाइजर (सीबीएस) के पद पर पदस्थ हैं। इटारसी रेलवे स्टेशन पर 5 दिसंबर 2024 से 6 दिसंबर 2024 के बीच रेलवे टिकटों से प्राप्त 4,47,706 रुपये नकद के कथित गबन के आरोप में कुमारी रिंकी पटेल (असिस्टेंट चीफ बुकिंग सुपरवाइजर), भावना राय (चीफ बुकिंग सुपरवाइजर, इटारसी) और अनिल कुमार राय (स्टेशन मैनेजर) के खिलाफ एक साल बाद 15 जनवरी 2026 को रिपोर्ट दर्ज करवाई गई।
गबन के आरोपों की जांच जारी
जिस अवधि में राशि का गबन हुआ, उस दौरान वह अवकाश पर थीं। उनकी पेमेंट एक लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक है और महज साढ़े चार लाख रुपये की राशि के लिए वह अपने करियर, पेंशन और सामाजिक प्रतिष्ठा को दांव पर कैसे लगा सकती हैं। विभागीय जांच में अन्य व्यक्ति को दोषी माना गया है। शासन की तरफ से अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि अपराध रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से पूर्व निर्धारित साजिश के तहत किया गया था। याचिकाकर्ता के अवकाश पर रहने के कारण यह नहीं माना जा सकता है कि उसका अपराध से कोई संबंध नहीं था। उसकी और अन्य आरोपियों की अपराध में सटीक भूमिका की जांच अभी बाकी है। साजिश और सार्वजनिक धन के गबन के गंभीर आरोपों की जांच जारी है।
