जबलपुर। जबलपुर नगर निगम चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है। चुनाव में अभी करीब 9-10 महीने का समय बाकी है और यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा तो जून-जुलाई तक नई नगर सरकार का गठन हो जाएगा। इस बार महापौर पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने की संभावना से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल रहे हैं। वर्तमान परिषद में भाजपा के 45 पार्षद, कांग्रेस के 28 पार्षद और 6 अन्य दलों एवं निर्दलीय पार्षद हैं। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू के भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक गलियारों में बड़ा बदलाव हुआ, जो कॉंग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। आगामी चुनावों को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने अपनी आंतरिक रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है।
सत्तारूढ़ दल के भीतर राजनीतिक कलह तेज
भाजपा में संगठन स्तर पर बैठकों का दौर बेहद तेज हो चुका है और टिकट की दावेदारी भी धीरे-धीरे शुरू हो गई है। जबलपुर नगर निगम के 79 वार्डों में होने वाले चुनाव में मौजूदा राजनीतिक तस्वीर बेहद दिलचस्प नजर आ रही है। हालांकि सत्तारूढ़ दल के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। हाल के दिनों में भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय बिश्नोई ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोक निर्माण मंत्री पर अपनी विधानसभा पाटन की सड़क की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अप्रत्यक्ष नाराजगी जाहिर की है। यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। इसके अलावा चार वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थायी समितियों का पूर्ण गठन नहीं हो सका है और एल्डरमेन की नियुक्तियां भी लंबे समय से लंबित पड़ी हैं। इसे लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
जनता की बुनियादी समस्याओं पर विपक्ष का हमला
शहर में जल संकट, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, टूटी सड़कें, बड़े गड्ढे, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है। हाल ही में इन सभी गंभीर मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने नगर निगम के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन भी आयोजित किया था। विपक्ष का मुख्य प्रयास यह है कि मौजूदा सरकार के कामकाज और कमियों को आगामी चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाया जाए। जनता के बीच जाकर इन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जा रहा है ताकि राजनीतिक जमीन मजबूत की जा सके और चुनावी वैतरणी पार की जा सके।
अतिक्रमण हटाने के विरोध में टकराव
दूसरी ओर जबलपुर विकास प्राधिकरण यानी जेडीए की योजना क्रमांक 11 के अंतर्गत संजय नगर और लक्ष्मीपुर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी। इस कार्रवाई के दौरान उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक खुद सड़क पर उतर आए। प्रभावित लोगों के समर्थन में उनका खुलकर सामने आना कई बड़े राजनीतिक सवाल खड़े कर गया है। इसे भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर बढ़ती असहजता और शक्ति संतुलन की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थानीय नेताओं की सक्रियता और राजनीतिक संदेश दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता के बीच कौन सा मुद्दा सबसे प्रभावी साबित होता है।
