नगर निगम की लापरवाही से संकट में जबलपुर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, 60 प्रतिशत पाइप लाइनें नालों के भीतर, श्वेत पत्र की उठी मांग
जबलपुर। जबलपुर में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की पोल खुल गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए जलापूर्ति तंत्र पर तत्काल श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। शहर में 60 प्रतिशत पीने के पानी की पाइप लाइनें गंदे नालों और नालियों के भीतर से निकल रही हैं, जिससे नागरिकों को दूषित पानी मिलने का भारी खतरा बना हुआ है। इस मामले में नगर निगम के अफसरों ने स्वीकार किया कि 20 प्रतिशत अत्यधिक पुरानी पाइप लाइनों का उनके पास कोई डेटा और स्पष्ट रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है।
बिना नक्शे अमृत योजना में नहीं बदलेंगी लाइनें
मंच अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे ने आयुक्त को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि अमृत 1.0 योजना के तहत भूमिगत पाइप लाइनों का डिजिटल मैप और विस्तृत डीपीआर तैयार नहीं किया गया। नतीजा यह है कि अब अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत भी इन पुरानी और जर्जर लाइनों को बदलना संभव नहीं हो पा रहा है। शहर के भूमिगत नेटवर्क की जमीनी जानकारी न होने से जलापूर्ति सुधार की पूरी योजना कागजों में उलझ गई है।
आवंटित 10 करोड़ रुपये का बजट नहीं हुआ खर्च
महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू से 20 अगस्त को हुई बातचीत में सामने आया कि पेयजल लाइनों के सुधार के लिए मिला 10 करोड़ रुपये का फंड अब तक खर्च नहीं किया जा सका है। अधारताल स्थित कार्यालय में हुई बैठक में मनीष शर्मा, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, पी.एस. राजपूत, यशवंत कोष्टा, श्याम सोलंकी, अशोक यादव और राममिलन शर्मा ने प्रशासन की लापरवाही पर भारी नाराजगी जताई।
