कर्मचारियों का आरोप है कि शासन द्वारा स्वीकृत बजट और दिशा-निर्देशों के बावजूद संबंधित ठेका कंपनियों और विभागीय उदासीनता के कारण उनका शोषण किया जा रहा है। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन में कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए बताया कि कई विभागों में महीनों तक वेतन का भुगतान नहीं होता। उन्होंने मांग की है कि हर महीने की 6 से 7 तारीख के बीच अनिवार्य रूप से वेतन दिया जाए। इसके अलावा, कर्मचारियों के वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा की राशि तो काट ली जाती है, लेकिन ठेकेदारों द्वारा इसे संबंधित खातों में जमा नहीं किया जाता। कर्मचारियों ने इस वित्तीय धोखाधड़ी की उच्च स्तरीय जांच कराने और ईपीएफ/ईएसआईसी की रसीदें उपलब्ध कराने की मांग की है। रोजगार की अनिश्चितता को कर्मचारियों ने अपनी सबसे बड़ी समस्या बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार अपनी मनमानी करते हुए अनुभवी और पुराने कर्मचारियों को बिना किसी वैध कारण के नौकरी से निकाल देते हैं। साथ ही, नियमानुसार मिलने वाले आकस्मिक अवकाश (ष्टरु) और चिकित्सीय अवकाश जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी लागू करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है।
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