जबलपुर। पवित्र सावन मास का पहला सोमवार कल है। हर तरफ भोले की भक्ति दिखाई दे रही है। इसके बाद 10 अगस्त को दूसरे सोमवार पर गौरीघाट से 35 किलोमीटर की भव्य कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। 17 अगस्त को तीसरे सोमवार पर पूरे 23 साल यानी वर्ष 2003 के बाद नागपंचमी का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। साथ ही 24 अगस्त को चौथे सोमवार पर विभिन्न मंदिरों में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और पूजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण तथा 27 और 28 अगस्त की रात को आंशिक चंद्र ग्रहण का खगोलीय योग रहेगा जिसका देश में कोई सूतक नहीं लगेगा। अंत में 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के साथ इस पवित्र मास का समापन संपन्न होगा।
दूसरे सोमवार को निकलेगी ऐतिहासिक भव्य कांवड़ यात्रा।
सावन मास के पहले सोमवार से शहर के तमाम शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी। भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक का यह सिलसिला पूरे महीने उत्साह के साथ चलेगा। इसी क्रम में 10 अगस्त को पड़ने वाले दूसरे सोमवार को एक बड़ी और भव्य कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाएगा जो गौरीघाट से शुरू होकर 35 किलोमीटर का सफर तय करते हुए मटामर पहुंचेगी। वहां नर्मदा जल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद 17 अगस्त को तीसरा सोमवार नागपंचमी के पर्व के साथ आ रहा है, जो 23 साल बाद यानी 2003 के बाद एक दुर्लभ संयोग बना रहा है। इस दिन मदन महल के शारदा मंदिर में झंडे अर्पित किए जाएंगे और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए विशेष पूजा होगी।
ग्रहण काल का देश पर नहीं होगा असर
इस बार सावन मास में दो बड़े खगोलीय ग्रहण का योग बन रहा है जिसके बारे में ज्योतिषीय स्पष्टता दी गई है। पंचांग के अनुसार 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण तथा 27 और 28 अगस्त की रात को आंशिक चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है। हालांकि राहत भरी बात यह है कि ये दोनों ग्रहण भारत की भौगोलिक सीमा में दिखाई नहीं देंगे। खगोलीय नियमों के अनुसार देश में दृश्यमान न होने के कारण इन ग्रहणों का कोई भी सूतक काल मान्य नहीं होगा। परिणामस्वरूप सावन के सभी धार्मिक अनुष्ठान, रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ पूरी तरह सामान्य रूप से संपन्न किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की धार्मिक शंका या बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे निर्बाध रूप से अपनी साधना पूरी कर सकेंगे।
रक्षाबंधन पर्व के साथ होगी सावन की समाप्ति
सावन के अंतिम चरण में 24 अगस्त को चौथे सोमवार के अवसर पर शहर के कई प्रमुख मंदिरों में विशेष रूप से पार्थिव शिव लिंग का निर्माण किया जाएगा और उनका विधिवत पूजन संपन्न होगा। सावन मास का यह पूरा पवित्र महीना अंततः 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा, रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म के साथ संपन्न होगा। महीने भर चलने वाली भगवान भोलेनाथ की विशेष आराधना का समापन इसी अंतिम दिन होगा। शिव भक्तों के लिए यह पूरा सावन मास आध्यात्मिक ऊर्जा, पारिवारिक स्नेह और दृढ़ धार्मिक आस्था का एक अनोखा और दिव्य संगम लेकर आया है। इस बार के दुर्लभ संयोगों और खगोलीय स्थितियों के कारण इस सावन का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है जिससे हर उम्र के लोगों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है।
