जबलपुर। मध्यप्रदेश सहित जिले के सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन समय पर शुरू कराने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था में अहम बदलाव किया है। जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे ने स्पष्ट किया है कि अब सभी शिक्षकों को सुबह 10.30 बजे से पहले ई-अटेंडेंस लगानी होगी और इसके बाद दर्ज उपस्थिति पूरी तरह अमान्य रहेगी। दरअसल 11 बजे के बाद शिक्षकों के स्कूल पहुंचने से पढ़ाई प्रभावित होने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को देखते हुए विभाग ने यह कड़ा कदम उठाया है और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी जारी की है, ताकि कक्षाओं का संचालन सुचारू रह सके। हालांकि प्रदेश भर में शिक्षक इस व्यवस्था से असंतुष्ट होकर अदालत का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं।
लॉगिन समय बदलने से शिक्षकों में गहरा असमंजस
डिजिटल उपस्थिति लागू होने के बाद से लॉगिन की समय-सीमा में निरंतर फेरबदल देखने को मिला है। शुरुआती दौर में शिक्षकों को उपस्थिति दर्ज करने के लिए सुबह 9.30 से 11.30 बजे तक का समय दिया गया था। इसके बाद इस अवधि को घटाकर सुबह 9.30 से 11 बजे तक सीमित कर दिया गया। व्यवस्था को और सख्त करते हुए समय को 9.30 से 10.30 बजे तक तय किया गया और अब अंतिम समय से पहले ही हाजिरी लगाना अनिवार्य बना दिया गया है। लगातार हो रहे इन परिवर्तनों के कारण शैक्षणिक अमला इस बात को लेकर संशय में है कि विभाग की अंतिम और स्थायी समय-सीमा क्या रहने वाली है।
जिले के 620 शिक्षक डिजिटल प्रणाली से बाहर
मध्य प्रदेश शासन ने निर्देशों का पालन न करने वाले अध्यापकों का पूरा रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। सामने आए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक जिले के लगभग 14 प्रतिशत शिक्षक अब तक इस नई व्यवस्था से नहीं जुड़ पाए हैं। अधिकारियों ने ऐसे कर्मियों की पहचान के लिए सभी विकासखंड स्तर के कार्यालयों से विस्तृत ब्योरा तलब किया है। प्रशासन का पहला प्रयास यह जानना है कि किन तकनीकी अथवा व्यावहारिक कारणों से ये कर्मी मोबाइल एप्लिकेशन पर उपस्थिति दर्ज कराने में असमर्थ रहे हैं। शेष अधिकांश शिक्षक नियमित तौर पर अपने कर्तव्य स्थल से हाजिरी दर्ज कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की सख्त चेतावनी दी
प्रशासनिक सख्ती और लगातार कड़े होते नियमों के विरोध में कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस बाध्यकारी व्यवस्था पर गहरा ऐतराज जताते हुए शासन को ज्ञापन सौंपने और सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। उनका तर्क है कि नेटवर्क की समस्या और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की व्यावहारिक परिस्थितियों को समझे बिना एकतरफा दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर शासन का स्पष्ट मत है कि विद्यालयों में अनुशासन स्थापित करने और शैक्षणिक माहौल को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है।
