जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने जबलपुर के ग्राम छेवला स्थित विवादित जमीन पर शंभू नाथ सोनकर और तलविंदर गुजराल के पक्ष में जारी नामांतरण व नक्शा बटांकन आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता भूरेलाल अहिरवार की ओर से अधिवक्ता सौरभ कुमार शर्मा ने कोर्ट को बताया कि इस भूमि पर 13 जनवरी 2016 से उच्च न्यायालय का यथास्थिति आदेश प्रभावी था। इसके बावजूद नायब तहसीलदार भीमसेन पटेल ने 7 जुलाई 2026 को अपना तबादला होने के बाद 6 जुलाई 2026 की पिछली तारीख डालकर अवैध आदेश पारित कर दिया। अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए 3 फरवरी 2026 और 6 जुलाई 2026 के दोनों राजस्व आदेशों को रोकते हुए अनावेदकों को जवाब तलब करने का नोटिस थमा दिया है।
यथास्थिति के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर
याचिका में उठाए गए कानूनी बिंदुओं के तहत स्पष्ट किया गया कि जब किसी अचल संपत्ति का प्रकरण प्रदेश की शीर्ष अदालत में विचाराधीन होता है, तब प्रशासनिक अमले को उसमें कोई भी भौतिक या दस्तावेजी बदलाव करने का अधिकार नहीं रहता। राजस्व अधिकारी ने न्यायिक मर्यादाओं की अनदेखी करते हुए निजी पक्षकारों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। नामांतरण पंजी में नाम दर्ज करने और नक्शे को विभाजित करने की यह संपूर्ण प्रक्रिया सीधे तौर पर विधिक प्रावधानों के विपरीत संचालित की गई, जिससे मूल पक्षकार के विधिक अधिकारों पर सीधा आघात पहुंचा।
एकलपीठ ने अनावेदकों से मांगा लिखित स्पष्टीकरण
प्रारंभिक दलीलों का परिशीलन करने के पश्चात न्यायपीठ ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सभी विपक्षी पक्षों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। न्यायालय ने विवादित भूखंड पर पूर्व स्थिति की बहाली सुनिश्चित करते हुए भविष्य में किसी भी तीसरे पक्ष के हित सृजन पर तात्कालिक प्रतिबंध लगा दिया है। शासन और संबंधित पक्षकारों को निर्धारित अवधि के भीतर अपने औपचारिक शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर प्रशासनिक स्तर पर हुई इस कार्यशैली की अंतिम समीक्षा की जाएगी।
