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एमपी हाईकोर्ट सरई स्टेशन पर कोयला डंपिंग पर सख्त, पमरे से कहा- रेलवे स्टेशन खाली करो

जबलपुर। मध्य हाईकोर्ट ने पश्चिम मध्य रेलवे को जबलपुर रेल मंडल के सरई स्टेशन के प्लेटफार्म खाली कराने के अंतरिम निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया कि कोयले की धूल, कालिख और मलबे से यात्रियों के साथ आसपास के नागरिकों को भी परेशानी हो रही है।

सरई के ग्राम शिवगढ़ निवासी अधिवक्ता विनय जायसवाल ने याचिका दायर की है। आरोप है कि यात्रियों के लिए निर्धारित प्लेटफार्म का इस्तेमाल करीब तीन वर्षों से कोयला लोडिंग-अनलोडिंग के लिए किया जा रहा है, जबकि शुरुआत में अनुमति केवल तीन महीने के लिए दी गई थी। सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से एडिशनल सालिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने जवाब पेश किया। रेलवे ने बताया कि सरईग्राम स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 741 यात्री आते हैं।

सुनवाई के दौरान रेलवे ने दिया जवाब

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एसके कश्यप ने रेलवे के जवाब का हवाला देते हुए बताया कि यात्रियों से रेलवे को करीब 16.46 लाख रुपये, जबकि कोयला लोडिंग-अनलोडिंग से करीब 26.48 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।

रेलवे ने कहा- अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण अनुमति दी

रेलवे ने बताया कि एसीसी ने पहले सरई ग्राम से करीब 10 किलोमीटर दूर सुरसुराईघाट झारा रेलवे स्टेशन से कोयला लोडिंग की अनुमति मांगी थी। हालांकि, परिचालन संबंधी अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण सरईग्राम स्टेशन से लोडिंग की अनुमति दी गई।

यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा

एसीसी का 20 जून 2023 का पत्र भी कोर्ट में पेश किया गया। इस याचिका में प्लेटफार्म पर कोयले की कालिख से बेंच, पेयजल बूथ और प्रतीक्षालय प्रभावित होने तथा यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा बताया गया है। हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश में रेलवे को प्लेटफार्म से कोयला हटाने के निर्देश दिए हैं।

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