रक्षा मंत्री ने बताया कि भारतीय सेना को हर साल बड़ी संख्या में टैंकों के पुनरुद्धार और रखरखाव की जरूरत होती है। जबलपुर की नई परियोजना इस जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हर साल 12 टी-72 टैंकों का पूर्ण ओवरहॉल और अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक प्लांट के साथ टैंकों के रखरखाव, मरम्मत और परीक्षण के लिए टेस्टिंग ट्रैक भी विकसित किया जाएगा। अभी टी-72 टैंकों के ओवरहॉल की मुख्य जिम्मेदारी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री, आवड़ी, चेन्नई के पास है। जबलपुर में नई सुविधा विकसित होने से देश में टैंकों के ओवरहॉल की उपलब्ध क्षमता बढ़ेगी और सेना को जरूरत के अनुसार टैंकों को जल्द ऑपरेशनल स्थिति में लाने में मदद मिलेगी।
पायलट प्रोजेक्ट में दो टी-72 टैंक किए ओवरहॉल-
नई परियोजना से पहले व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने टी-72 टैंकों के ओवरहॉल की दिशा में पायलट प्रोजेक्ट पर काम किया था। फैक्ट्री ने दो टी-72 टैंकों का ओवरहॉल पूरा कर उन्हें भारतीय सेना को सौंपा। इस दौरान सेना की तकनीकी स्पेसिफिकेशन और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार टैंकों की जांच, मरम्मत और जरूरी पुर्जों को बदलने का काम किया गया।
रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.80 लाख करोड़-
रक्षा मंत्री ने देश में बढ़ते रक्षा उत्पादन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी करीब 1,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
जबलपुर बन रहा रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र-
जबलपुर लंबे समय से रक्षा उत्पादन से जुड़ी प्रमुख निर्माणियों का केंद्र रहा है। यहां व्हीकल फैक्ट्री सहित अन्य रक्षा निर्माण इकाइयां सेना के लिए विभिन्न उपकरण और प्रणालियां तैयार करती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में जबलपुर की चार प्रमुख रक्षा निर्माणियों ने मिलकर 4,622 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड उत्पादन किया था। इनमें व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का उत्पादन करीब 1,056 करोड़ रुपए रहा था। नई टी-72 ओवरहॉल परियोजना से जबलपुर की रक्षा क्षेत्र में भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।