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जबलपुर मेडिकल कॉलेज में स्टाफ संकट: 2400 बिस्तरों पर मात्र 550 नर्सिंग ऑफिसर

जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट से जूझ रही हैं। महाकौशल अंचल के इस 2400 से अधिक बिस्तरों वाले सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में 1000 से अधिक नर्सिंग ऑफिसरों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में महज 550 स्टाफ ही सेवाएं दे रहा है। पुराने और नए ब्लॉक के 1600 बिस्तरों के अलावा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और पल्मोनरी विभाग का भार भी इन्हीं कर्मचारियों पर है। नर्सिंग संघ की जिला अध्यक्ष सीमा दुबे के अनुसार वर्ष 2019 और 2021 के बाद से नई भर्तियां ठप हैं। लगातार पत्राचार के बाद भी प्रशासन ने समाधान नहीं निकाला, जिसके चलते स्टाफ ने सितंबर माह में हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

रिक्त पदों के कारण काम का भारी दबाव

मेडिकल कॉलेज परिसर में पिछले कुछ वर्षों में नए भवन और आधुनिक चिकित्सा विभाग शुरू हुए हैं, जिससे मरीजों का दबाव कई गुना बढ़ गया है। जबलपुर संभाग सहित आसपास के अनेक जिलों से गंभीर मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। स्वीकृत पदों के अनुपात में नर्सिंग कर्मियों की संख्या आधी से भी कम होने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक तनाव बना रहता है। स्थिति यह है कि अनेक बार नर्सिंग कर्मियों को उनके साप्ताहिक अवकाश के दिन भी आपात ड्यूटी पर बुलाना पड़ता है। लगातार बढ़ रहे कार्यभार से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

सेवानिवृत्ति और प्रतिनियुक्ति से बढ़ा संकट

अस्पताल में मौजूद 550 नर्सिंग स्टाफ में से कई कर्मचारियों की सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर अन्य प्रशासनिक विभागों में ली जा रही हैं। इसके अलावा हर महीने कुछ वरिष्ठ कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे रिक्त पदों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लंबे समय से नियमित भर्ती प्रक्रिया न होने के कारण खाली पदों की भरपाई नहीं हो पाई है। अस्पताल प्रशासन को स्थिति से लगातार अवगत कराया जाता रहा है, लेकिन बजट और नियमों की लाचारी बताकर मामले को टाल दिया जाता है। इस अनदेखी के कारण वार्डों में भर्ती मरीजों की नियमित देखभाल प्रभावित हो रही है।

मांग पूरी न होने पर आंदोलन की तैयारी

नर्सिंग संघ ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए आरपार की रणनीति तैयार कर ली है। संगठन ने नए पदों के सृजन और तत्काल भर्ती की मांग को लेकर प्रबंधन को 1 माह का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। संघ का कहना है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर शासन स्तर पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो सितंबर माह में संपूर्ण नर्सिंग स्टाफ कार्य बंद कर हड़ताल पर चला जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो पूरे महाकौशल अंचल की आपातकालीन और नियमित चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी, जिसकी सीधी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन और शासन की होगी।

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