जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ के बैनर तले जबलपुर के भंवरताल गार्डन में विभिन्न विभागों के कर्मियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रोजगार सुरक्षा और बकाया वेतन के मुद्दों को उठाना था। निर्णय लिया गया कि मांगें पूरी न होने पर 17 अगस्त को प्रदेश के सभी 55 जिलों के कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन किया जाएगा। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने कहा कि जबलपुर में करीब 20 हजार आउटसोर्स कर्मी हैं लेकिन 10 हजार रुपये के वेतन में घर चलाना कठिन है। नगर निगम समेत कई विभागों में 6 महीने का वेतन बकाया है और ठेकेदारों की मनमानी से नौकरी जाने का खतरा बना रहता है। साल 2023 के वचन पत्र के वादे भी पूरे नहीं किए गए हैं।
ठेकेदारों की मनमानी और नौकरी जाने का डर
विभिन्न विभागों में काम करने वाले इन कर्मचारियों का आरोप है कि ठेका प्रथा के कारण उनका लगातार शोषण हो रहा है। ठेकेदार बदलते ही पुरानी सेवाओं को दरकिनार कर दिया जाता है और बिना किसी स्पष्ट कारण के कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया जाता है। इस कारण हमेशा मानसिक तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि उनसे तय समय से अधिक काम लिया जाता है लेकिन मेहनताना समय पर नहीं मिलता। सामाजिक सुरक्षा का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है जिससे उनके परिवारों का जीवन यापन बेहद दयनीय स्थिति में पहुंच गया है।
17 अगस्त को प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
सरकार की ओर से पूर्व में किए गए वादों के बावजूद मैदानी हकीकत पूरी तरह विपरीत है। साल 2023 के चुनाव के दौरान जारी किए गए वचन पत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कई राहत भरी घोषणाएं की गई थीं लेकिन वे सभी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई हैं। वेतन विसंगतियों और प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर अब इन कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला स्तर पर ज्ञापन देने के बाद भी सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
