माध्यमिक शिक्षा मंडल को संशोधित अंकसूची जारी करने का निर्देश, मेधावी छात्र योजना के लिए भी मिली पात्रता
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से 12वीं कक्षा की एक छात्रा के मूल्यांकन में हुई बड़ी लापरवाही दुरुस्त हो सकी है। हाई कोर्ट के जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकल पीठ द्वारा रसायन शास्त्र की उत्तरपुस्तिका की स्वतंत्र विषय-विशेषज्ञों से दोबारा जांच कराए जाने पर छात्रा के 15 अंक बढ़ गए। अदालत ने माध्यमिक शिक्षा मंडल को तत्काल प्रभाव से नई मार्कशीट जारी करने के निर्देश दिए हैं। यह याचिका 12वीं कक्षा की छात्रा एकता साहू की ओर से दायर की गई थी। छात्रा का कहना था कि बोर्ड परीक्षा में रसायन शास्त्र के प्रश्न-पत्र में उसे अनुमान से बेहद कम केवल 37 अंक प्रदान किए गए थे, जिससे उसका कुल प्रतिशत प्रभावित हुआ। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेकानंद आरबी, परमानंद साहू और उमाकांत साहू ने पैरवी करते हुए मूल्यांकन में गंभीर त्रुटियों का दावा किया और निष्पक्ष जांच की मांग रखी।एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र विषय-विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर उत्तरपुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन कराया। विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि छात्रा के 15 अंक कम जोड़े गए थे, जिसके बाद उसके अंक 37 से बढ़कर 52 हो गए। इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने माध्यमिक शिक्षा मंडल को छात्रा को 52 अंकों के साथ संशोधित अंकसूची प्रदान करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने छात्रा को मेधावी छात्र योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नए सिरे से आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की है।
