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​15 अगस्त बीता, अब बिना ई-केवाईसी वाले गैस सिलेंडरों पर खतरा



जबलपुर। जिले में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए तय 15 अगस्त की अंतिम तारीख बीत जाने के बाद भी लगभग 20 प्रतिशत लोगों ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। शासन और तेल कंपनियों के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद इस सुस्ती के चलते अब संबंधित उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी बंद होने या सिलेंडर के लिए लगभग दोगुनी कीमत चुकाने की नौबत आ सकती है। वर्तमान में 948.50 रुपये में मिलने वाला घरेलू सिलेंडर प्रमाणीकरण न होने की दशा में 1897 रुपये तक का पड़ सकता है। प्रभारी जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक आरएस मरावी ने स्पष्ट किया है कि गैस एजेंसियों को शेष बचे उपभोक्ताओं से सीधा संपर्क साधकर सत्यापन प्रक्रिया जल्द पूरी कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि लोगों को आगामी दिनों में आर्थिक नुकसान और आपूर्ति संकट का सामना न करना पड़े।

​तीनों प्रमुख गैस कंपनियों की ये है स्थिति

​जिले भर में पेट्रोलियम कंपनियों के नेटवर्क के तहत लाखों उपभोक्ता पंजीकृत हैं। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार आईओसी कंपनी के पास 2,62,680 उपभोक्ता दर्ज हैं। वहीं एचपीसी के 2,75,340 और बीपीसी के 2,35,498 उपभोक्ता सेवाएं ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 1,78,264 लाभार्थी कनेक्शन मौजूद हैं। शासन स्तर से गैस कनेक्शनों के बायोमैट्रिक और डिजिटल प्रमाणीकरण का यह औपचारिक आदेश वर्ष 2023 में ही जारी किया गया था। लंबे समय से चल रहे इस अभियान के बाद भी एक बड़ा उपभोक्ता वर्ग अब तक पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कराने से वंचित है।

​ग्रामीण अंचल में जागरूकता की भारी कमी

​प्रमाणीकरण की जमीनी स्थिति पर नजर डालें तो शहरी और देहात क्षेत्र में भारी अंतर दिखाई देता है। शहरी सीमा में लगभग 80 प्रतिशत लोग अपना प्रमाणीकरण करवा चुके हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर महज 65 प्रतिशत के आसपास सिमटी हुई है। गांवों में निवासरत अधिकांश आबादी दैनिक मजदूरी पर निर्भर है, जो सुबह सवेरे काम पर निकलकर देर शाम घर लौटती है। तकनीकी जानकारी के अभाव और मोबाइल आधारित ऑनलाइन प्रक्रिया से अनभिज्ञता के कारण भी यह काम पिछड़ा है। इसी बाधा को दूर करने के लिए अब दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।

​वितरण व्यवस्था पर भी पड़ सकता असर

​प्रशासनिक स्तर पर तय समय सीमा निकलने के उपरांत अब बिना सत्यापन वाले खातों को सामान्य या गैर-सब्सिडी श्रेणी में डालने की तैयारी है। इससे नियमित घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने के साथ-साथ उपभोक्ता को बाजार दर पर अधिक भुगतान करना पड़ेगा। गैस वितरण एजेंसियों के मैदानी कर्मचारियों को उपभोक्ताओं से संपर्क कर मोबाइल एप के जरिए बायोमैट्रिक मिलान करने का दायित्व सौंपा गया है। समय रहते यह औपचारिकता पूरी न करने वाले परिवारों को आने वाले दिनों में रिफिल बुकिंग के दौरान प्रणालीगत रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।

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