ग्रामीणों की सतर्कता और पुलिस तत्परता से टला संकट
जबलपुर। पटना बिहार से परिजनों से नाराज होकर निकला 10 वर्षीय बालक ट्रेन से लंबा सफर तय कर जबलपुर के कटंगी थाना क्षेत्र अंतर्गत बोरिया गांव पहुंच गया। अनजान जगह पर अकेले और घबराई हालत में भटक रहे इस बच्चे पर जब ग्रामीणों की नजर पड़ी, तो उन्होंने इसकी जानकारी जिला पंचायत सदस्य ठाकुर सतेंद्र सिंह को दी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए कटंगी पुलिस को तुरंत सूचना दी। इस पर थाना प्रभारी गोपेंद्र राजपूत, आरक्षक लोकेंद्र अहिरवार, आरक्षक गीतेश तथा 112 वाहन पायलट इस्लाम खान मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने बच्चे को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। पुलिस ने बाल मनोविज्ञान के आधार पर पूछताछ कर परिजनों को तलाशा और बालक को वापस घर भेजने की ठोस व्यवस्था की।
संवेदनशील संवाद से जुटाया घर का सही पता
पुलिस टीम ने अनजान परिवेश में डरे-सहमे बालक को पहले पूरी तरह आश्वस्त किया। उसे भोजन और पानी देकर सहज वातावरण दिया गया। इसके बाद उससे आत्मीयता से बातचीत शुरू की गई। बातचीत में बच्चे ने बताया कि वह घरेलू नाराजगी के चलते अचानक घर छोड़ बैठा था। स्टेशन पर खड़ी रेलगाड़ी में सवार होने के बाद उसे दिशा का भान नहीं रहा और वह सैकड़ों किलोमीटर दूर पहुंच गया। कटंगी बाईपास से होते हुए वह रास्ते की अनभिज्ञता के कारण सीधे बोरिया की गलियों में आ गया था। पुलिसकर्मियों ने धैर्य के साथ उसके निवास, नजदीकी पहचान और परिजनों के संपर्क सूत्र जुटाए।
माता-पिता के चेहरे पर लौटी मुस्कान
उपलब्ध जानकारी के सहारे पुलिस ने तत्काल बिहार में बच्चे के रिश्तेदारों से संपर्क स्थापित किया। बेटे के सकुशल मिलने का समाचार पाते ही रोते-बिलखते माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। कटंगी पुलिस ने इस पूरी कार्यवाही में विधिक एवं प्रारंभिक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किया, जिससे बालक को बिना किसी असुविधा के परिजनों को सुपुर्द करने की राह खुली। यदि ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि समय पर सजगता न दिखाते, तो अपरिचित इलाके में मासूम किसी अवांछित गतिविधि अथवा गंभीर खतरे का शिकार बन सकता था। सूचना तंत्र की तेजी और पुलिस बल के मानवीय दृष्टिकोण ने एक बिछड़े बालक को नया जीवन दिया।
