रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका पर आरोप है कि उन्होने फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के जरिए पाठक परिवार की कई कंपनियों पर कब्जा हासिल करने की कोशिश की। करीब 1000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की। पुलिस के अनुसार गोयनका पहले पाठक परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में प्रबंधन से जुड़े पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होने वित्तीय अनियमितताएं कीं और कंपनी का माल बेचकर बड़े पैमाने पर गबन किया। कोलकाता पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 420, 120-बी, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की है।
महेन्द्र गोयनका पर कटनी में भी दर्ज हैं केस
महेंद्र गोयनका और उसके सहयोगियों के खिलाफ मध्य प्रदेश के कटनी में भी जालसाजी के दो मामले दर्ज हैं। सहयोगी निदेशकों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं। पुलिस के अनुसार, इनमें से कुछ आरोपी लंबे समय से फरार हैं। 9 मई 2025 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की मुंबई पीठ ने एक आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका से जुड़े वित्तीय गबन के आरोपों पर सख्त टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा गोयनका की एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामले भी जांच के दायरे में रहे हैं।