जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में उठे बड़े प्रशासनिक विवाद के समाधान के लिए अब उच्च स्तर पर कवायद शुरू कर दी गई है। पिछले दिनों 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर जारी हुए आदेश के बाद उपजे भारी विरोध और असमंजस की स्थिति को शांत करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस पूरे घटनाक्रम में तब नया मोड़ आ गया जब कुलसचिव कार्यालय से जारी आदेश पर कुलगुरू प्रोफेसर राजेश वर्मा ने तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक अस्थायी रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि नियमितीकरण प्रक्रिया में कथित रूप से कुछ प्रशासनिक विसंगतियां सामने आई थीं जिसके बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। इस पूरी घटना के बाद से विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों के बीच गहमागहमी का माहौल है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस जांच के बाद प्रभावित कर्मियों के भविष्य को लेकर क्या अंतिम निर्णय लिया जाता है।
जांच के लिए तय नहीं है कोई समय सीमा
जांच समिति के गठन की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. मिलिंद दांडेकर को सौंपी गई है जो इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे। उनके साथ इस महत्वपूर्ण तीन सदस्यीय समिति में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस धीरेंद्र सिंह और पूर्व कुलपति रविन्द्र कान्हेरे को बतौर सदस्य शामिल किया गया है, जबकि सहायक कुलसचिव को इस पूरी प्रक्रिया का प्रस्तुतकर्ता बनाया गया है। कुलगुरु श्री वर्मा ने कुलसचिव कार्यालय से जारी नए आदेश 2026-701 के अनुसार जब तक इस पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक पूर्व में जारी आदेश के क्रियान्वयन पर पूरी तरह से अस्थायी रोक लगाई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस हाईप्रोफाइल जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई भी निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
कर्मचारी संघ भी बना रहे हैं अपनी रणनीति
कुलगुरु श्री वर्मा का इस मामले में स्पष्ट रूप से कहना है कि यह गठित विशेष समिति पूरे मामले की अत्यंत सूक्ष्मता और गहराई से जांच करेगी और उसके बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। जांच समिति की रिपोर्ट आने और उसमें पाई गई सभी प्रकार की विसंगतियों के पूरी तरह से निस्तारण होने के बाद ही इस संवेदनशील संबंध में आगे का कोई भी अंतिम फैसला लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम के बाद रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का कर्मचारी संघ भी अंदरखाने अपनी आगामी रणनीति तैयार करने में पूरी ताकत से जुटा हुआ है। यह पूरा मामला अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा बल्कि कोर्ट तक पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जांच कमेटी कब तक अपनी रिपोर्ट सौंपती है और इन 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण का यह बहुप्रतीक्षित मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
