जबलपुर। जिले के सिहोरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली सिदुरसी ग्राम पंचायत में एक चौंकाने वाला वित्तीय घोटाला सामने आया है। जहां स्व सहायता समूह की महिलाओं के नाम पर छह लाख रुपये का फर्जी ऋण दर्ज कर दिया गया है। इन महिलाओं ने जिला पंचायत से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक न्याय की गुहार लगाई है और नोडल अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने एक रुपये का भी कर्ज नहीं लिया है और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके बावजूद उन पर कर्ज चुकाने का भारी दबाव बनाया जा रहा है। जब इस बारे में अध्यक्ष, सचिव और नोडल अधिकारी से सवाल पूछा गया तो शुरुआत में इसे गलती से राशि दर्ज होना बताया गया। लेकिन बाद में प्रगति आजीविका ग्राम संगठन की ओर से जब पूरा पैसा चुकाने का दबाव डाला गया तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। पीड़ित महिलाओं में संगीता यादव, सोहबतिया बाई, अंजनी यादव, सोनम यादव, सीमा कोल और रोशनी कोल शामिल हैं जो लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हैं ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
किसी हाल नहीं देंगी रकम
इस पूरे मामले में महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर छह लाख रुपये की इस फर्जी राशि का भुगतान नहीं करेंगी क्योंकि उन्होंने इस पैसे का कभी उपयोग ही नहीं किया है। बिना किसी जानकारी और सहमति के महिलाओं के नाम पर ऋण दर्शाना एक गंभीर आपराधिक और वित्तीय अनियमितता है, जिससे गरीब महिलाओं का शोषण हो रहा है। संगठन से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोगों की संदिग्ध भूमिका के कारण इन महिलाओं को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने से महिलाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे अपनी मेहनत की कमाई बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
वित्तीय गड़बड़ी के खिलाफ सड़क पर उतरीं समूह की महिलाएं
सिदुरसी गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना बेहद जरूरी है। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते आज निर्दोष महिलाओं को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यदि समय रहते इस मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस तरह के फर्जीवाड़े में शामिल लोगों को तुरंत बेनकाब करे ताकि आम जनता का व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके।
