जबलपुर। शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में पदस्थ एक कर्मचारी सुनील कुमार जाट का कारनामा सामने आया है। सुनील कुमार ने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाकर निजी अस्पताल में लाखों रुपये का इलाज करा लिया। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर हुई जांच में सामने आया कि कर्मचारी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आयुष्मान योजना का लाभ लिया। स्वास्थ्य विभाग ने जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है और अब वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
खबर है कि जबलपुर में रहने वाले सुमित कुमार ने 7 जुलाई 2026 को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को शिकायत देकर बताया था कि शासकीय कला निकेतन पॉलिटेक्निक कॉलेज में पदस्थ यूडीसी सुनील कुमार जाट विवाहित हैं और उनके दो बेटे, दो बेटियां व पत्नी हैं। इसके बावजूद उन्होंने खुद को अविवाहित बताकर फर्जी तरीके से आयुष्मान योजना का लाभ लिया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सुनील कुमार ने दो समग्र आईडी बनवाईं। एक आईडी में पूरा परिवार दर्ज है, जबकि दूसरी आईडी में उन्होंने खुद को पात्र व्यक्ति का दत्तक सदस्य (अडॉप्टेड) दिखाकर नाम जुड़वाया। इसी आधार पर आयुष्मान कार्ड बनवाकर योजना का लाभ लिया। शिकायतकर्ता ने समग्र आईडी और आयुष्मान योजना से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे। जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए आयुष्मान कार्ड बनवाकर वर्ष 2023 से शहर के एक निजी अस्पताल में डायलिसिस और अन्य इलाज कराया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ। सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने बताया कि आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों की जांच में शिकायत सही पाई गई है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि समग्र आईडी में हेरफेर कर योजना का लाभ लिया गया। जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भेज दी गई है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले में दोषी पाए जाने पर सुनील कुमार जाट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। सीएमएचओ ने कहा कि आगे की वैधानिक कार्रवाई कलेक्टर के स्तर से की जाएगी।
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