सिवनी. एमपी के सिवनी में रविवार की सुबह केवलारी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कालीमाटी के जंगलों में एक बाघ का शव मिला. बाघ के शव मिलने की खबर के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. वन विभाग ने बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार किया.
घटना को लेकर जिला वन मंडलाधिकारी (ष्ठस्नह्र) गौरव मिश्रा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला दो बाघों के बीच आपसी संघर्ष का नजर आ रहा है. बाघ के गले में निशान मिले हैं, जो दूसरे बाघ के पंजे के मालूम पड़ते हैं. शरीर में काटने और नोंचने के भी निशान मिले हैं. इसके साथ ही गले की हड्डी भी टूटी हुई मिली है. संभवत: इस दौरान बाघ की मौत हुई है. हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है.
मौके पर पहुंचा वन अमला और डॉग स्क्वाड
इससे पहले, राष्ट्रीय पशु की मौत की खबर मिलते ही वन विभाग के आला अधिकारी और वन अमला डॉग स्क्वाड के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे. घटना की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने तत्काल पूरे घटनास्थल को सील कर दिया. डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के इलाके में बारीकी से साक्ष्य जुटाए गए, ताकि किसी भी तरह के फाउल प्ले या शिकार की आशंका को खारिज किया जा सके.
प्रोटोकॉल के तहत हुआ अंतिम संस्कार
वरिष्ठ अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराया गया. इसके बाद, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के कड़े नियमों और तय प्रोटोकॉल के तहत पूरे सम्मान के साथ बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया है. वन विभाग अब पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के नतीजों का इंतजार कर रहा है, ताकि डीएफओ के शुरुआती आकलन और मौत की सटीक वजहों पर अंतिम मुहर लग सके.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 10 जुलाई 2026 को उमरिया के बांधवगढ़ में एक वन्य प्राणी का कंकाल मिला था. जहां शुरुआती जांच में कंकाल बाघ का प्रतीत हुआ था. यहां भी पोस्टमार्टम के बाद वन्यप्राणी के शव का अंतिम संस्कार किया गया. इससे पहले 2 मई को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में एक बाघ की मौत हुई थी. वहीं अप्रैल 2026 में कान्हा टाइगर रिजर्व में 9 दिन में 4 बाघों की मौत की घटना सामने आई थी.
