जबलपुर। ओमती स्थित मालवीय चौक के आर.के. डिजिटल एक्स-रे, सोनोग्राफी एवं कलर डॉप्लर सेंटर के संचालक डॉ. राजेंद्र अग्रवाल और अधारताल के सरल सोनोग्राफी, एक्स-रे एवं पैथोलॉजी सेंटर के संचालक डॉ. सतीश अग्रवाल को अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण मामले में न्यायालय से जमानत मिल गई है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में दोनों सेंटरों को सील कर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद गिरफ्तार डॉक्टरों को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ वकील मनीष दत्त और निशांत दत्त की दलीलों पर राहत मिली। इस पूरे प्रकरण में नामजद फरार स्टाफ नर्स खुशी उर्फ अनीता उर्फ डॉली जायसवाल की तलाश में पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
कार्रवाई से स्वास्थ्य क्षेत्र में मचा हड़कंप
शहर के दो प्रमुख सोनोग्राफी सेंटरों पर हुई अचानक छापेमारी से चिकित्सा जगत में खलबली मच गई है। प्रशासनिक टीम ने जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन और भ्रूण जांच से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद ओमती व अधारताल स्थित दोनों संस्थानों को तुरंत सील कर दिया। देर रात संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने सख्त कदम उठाया। इस त्वरित कार्रवाई के बाद से शहर के अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
आरोपी नर्स की सरगर्मी से तलाश
अदालत से जमानत मिलने के बाद पुलिस अब मामले के तकनीकी पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है। वहीं गिरोह से जुड़ी मुख्य आरोपी नर्स खुशी लगातार जगह बदल रही है। पुलिस की विशेष टीमें आरोपी महिला को पकड़ने के लिए उसके करीबियों और रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार जिले में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए अभियान जारी रहेगा और नर्स की गिरफ्तारी से नए खुलासे होने की उम्मीद है।
