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जबलपुर: रेलवे का बड़ा फेलियर, बिना जी-9 कोच के प्लेटफार्म तक पहुंच गयी गरीबरथ, अमला रहा बेखबर

कोच नंबर G9 के इंतजार में खड़ी आधी ट्रेन

जबलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म पर मुसाफिरों के हंगामे के बाद शुरू हुई डिब्बे की तलाश,कोचिंग डिपो भेजनी पड़ी आधी ट्रेन

जबलपुर। जबलपुर से मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की ओर जाने वाली 12187 गरीब रथ एक्सप्रेस आज शाम यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन गई। ट्रेन जब प्लेटफॉर्म पर पहुंची तो उसमें जी-9 कोच नदारद था, जिसे लेकर यात्रियों में भारी आक्रोश फैल गया। रेलवे स्टाफ की इस गंभीर लापरवाही के कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कोच न होने की जानकारी न तो स्टेशन प्रशासन को थी और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी को। जब यात्रियों ने रिजर्वेशन चार्ट देखकर हंगामा शुरू किया, तब रेलवे प्रशासन हरकत में आया। इस पूरी कवायद के बीच ट्रेन  1 घण्टे की देरी से रवाना हो सकी। इस घटना को रेलवे का बड़ा प्रशासनिक फैलियर माना जा रहा है।

मेंटेनेंस के बाद कोच जोड़ना ही भूल गए

​सूत्रों के मुताबिक जी-9 कोच को तकनीकी सुधार के लिए ट्रेन से अलग किया गया था, लेकिन उसे वापस ट्रेन में जोड़ने की प्रक्रिया को रेलवे स्टाफ पूरी तरह भूल गया। यह एक अत्यंत गंभीर चूक है क्योंकि ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आने से पहले किसी भी स्तर पर डिब्बों की संख्या का मिलान नहीं किया गया। स्टेशन पर एक समय ऐसा विचित्र दृश्य बन गया था जब ट्रेन का आधा हिस्सा प्लेटफॉर्म पर खड़ा था और शेष हिस्सा डिब्बे को लाने के लिए कोचिंग डिपो ले जाया गया। यह अव्यवस्था रेलवे की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़े करती है। इस घटना से यात्रियों का कीमती समय बर्बाद हुआ और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न चिह्न लग गए हैं। अब इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

जिम्मेदार कौन और कैसे तय होगी जवाबदेही

​रेलवे में ट्रेन के कोच की गिनती और उसे लगाने के लिए कोचिंग डिपो का अमला जिम्मेदार होता है। इस मामले में स्पष्ट रूप से प्राथमिक स्तर पर चेकिंग करने वाले स्टाफ की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जब एक कोच मेंटेनेंस के लिए जाता है, तो उसे वापस लाने और ट्रेन में जोड़ने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। चूक उस कड़ी में हुई है जहां से ट्रेन को फाइनल तौर पर ओके दिया जाता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या केवल हंगामे के बाद ही रेलवे सिस्टम जागेगा या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस तंत्र बनाया जाएगा। इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि यात्रियों की सुरक्षा और समय के साथ दोबारा खिलवाड़ न हो।

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