khabar abhi tak

डिजिटल होगी फायर एनओसी प्रक्रिया, टैक्स के दोहरे बोझ से उद्योग होंगे मुक्त



जबलपुर। फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि मंडल ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत एस भोंडवे से भोपाल में मुलाकात की। अध्यक्ष हिमांशु खरे के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधि मंडल ने उद्योगों की प्रमुख समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इसमें फायर एनओसी प्रक्रिया को सरल बनाने और संपत्ति कर नीति के युक्तिकरण की मांग प्रमुखता से रखी गई। आयुक्त ने उद्योगों को दोहरी कर प्रणाली से राहत दिलाने और फायर एनओसी की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर अधिकतम 4 स्टेप्स में पूरा करने का ठोस आश्वासन दिया। इस बैठक में प्रतिनिधि मंडल के सदस्य विरेन्द्र कुमार पोरवाल, डॉ आर एस गोस्वामी, अशोक आनंद, प्रवीण आचार्य, डॉ सुरेन्द्र सिंह एवं राजेश हिरवे मौजूद थे जिन्होंने आयुक्त के साथ विस्तार से चर्चा की।

​फायर एनओसी की जटिल प्रक्रिया को करेंगे सरल

​आयुक्त संकेत एस भोंडवे ने बताया कि फायर एक्ट के लागू होने के बाद नियमों का निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ एक विस्तृत बैठक बुलाई जाएगी। मुख्य रूप से नगर निगम सीमा के भीतर आने वाले उद्योगों को फायर एक्ट के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान किया जा रहा है। निगम सीमा से बाहर स्थित औद्योगिक इकाइयों के लिए नक्शा स्वीकृति और फायर एनओसी की पूरी प्रक्रिया को अब पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटलाइज किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य एनओसी पाने की प्रक्रिया को अधिकतम 4 स्टेप्स तक सीमित रखना है जिससे उद्यमियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिल सके और काम समय पर पूरा हो सके।

​दोहरे कराधान से उद्योगों को मिलेगी बड़ी राहत

​संपत्ति कर के मुद्दे पर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि विभाग इस नीति के युक्तिकरण पर काम कर रहा है। कई औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमी पहले से ही लीज रेंट, मेंटेनेंस और विकास शुल्क जैसे भुगतान कर रहे हैं। इसके साथ ही वहां की सड़कें, सफाई, रोशनी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी स्थानीय औद्योगिक संघ खुद संचालित कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में उद्योग जगत पर पड़ने वाले दोहरे कर के बोझ को कम करना प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नगरीय प्रशासन और उद्योग विभाग आपसी सामंजस्य बिठाकर ऐसी नीति तैयार करेंगे जिससे उद्यमियों को दोहरा टैक्स न देना पड़े। विभाग जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए उद्योग जगत के हित में नई गाइडलाइन तैयार करेगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak