नई दिल्ली. धर्मेंद्र प्रधान के पद छोडऩे के बाद शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथों में आ गई है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारियां भी पहले की तरह बनी रहेंगी. यानी वह अपने मौजूदा विभागों का काम संभालने के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों की जिम्मेदारी भी निभाएंगे.
नीट-यूजी विवाद से तेज हुई राजनीतिक हलचल
इस बदलाव की पृष्ठभूमि में नीट-यूजी 2026 परीक्षा से जुड़ा विवाद अहम माना जा रहा है. 3 मई 2026 को परीक्षा के बाद पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद कई छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए. धीरे-धीरे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया. इसी दौरान 15 मई को एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी चर्चा का विषय बनी. बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सामान्य छात्रों के लिए नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री के सहारे पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी.
जोशी के पास नई जिम्मेदारी के साथ बड़ी चुनौती
25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया, जबकि सीजेपी ने भी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की. अब प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी विवादित परिस्थितियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना होगी. शिक्षा मंत्रालय के सामने आने वाले दिनों में कई अहम फैसलों की चुनौती रहेगी.
