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बिजली कंपनियों का अभियान, गलत सब्सिडी पर लगेगी लगाम,उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा असर



जबलपुर। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के कारण बिजली की खपत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके चलते जबलपुर बिजली कंपनी सिटी सर्किल के हजारों उपभोक्ता गृह ज्योति योजना की सब्सिडी सीमा से बाहर हो गए हैं। जबलपुर सिटी सर्किल के अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा ने बताया कि जनवरी की तुलना में मार्च से जून के दौरान तापमान बढ़ने से एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ गया। इससे 100 और 150 यूनिट की सीमा पार होने पर उपभोक्ताओं का बिल 100 से 150 रुपए से बढ़कर 500 से 2,000 रुपए तक पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 2,17,286 लोगों को छूट मिल रही थी और 1,15,825 बाहर थे, जबकि जून में लाभ लेने वाले घटकर 1,25,665 रह गए और बाहर होने वालों का आंकड़ा बढ़कर 2,11,044 तक पहुंच गया।

​तापमान चढ़ते ही सब्सिडी का दायरा सिमटने लगा

​मौसम के मिजाज में आए बदलाव और कड़ाके की धूप ने घरेलू बजट का गणित पूरी तरह बिगाड़ दिया है। जब लोगों ने राहत पाने के लिए बिजली के उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल शुरू किया तो उनकी मासिक खपत निर्धारित यूनिट को पार कर गई। योजना के नियमों के अनुसार 100 और 150 यूनिट तक ही निर्धारित दर पर छूट का प्रावधान है। खपत बढ़ते ही उपभोक्ताओं को सामान्य टैरिफ के हिसाब से बिल थमा दिए गए। इससे हर महीने मामूली भुगतान करने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर सीधा बोझ आ पड़ा। विभाग का मानना है कि जैसे ही ठंडक बढ़ेगी, खपत कम होते ही उपभोक्ता दोबारा इस रियायत का लाभ उठाने के पात्र बन जाएंगे।

​गड़बड़ी रोकने के लिए मीटरों की जांच

​बिजली कंपनी ने सब्सिडी का गलत फायदा उठाने वाले परिसरों को चिन्हित करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। सिटी सर्किल में उन मकानों का विस्तृत डेटा तैयार किया गया है जहां एक ही परिसर के भीतर दो मीटर चालू पाए गए हैं। विभागीय अधिकारियों की टीम मौके पर जाकर जांच कर रही है कि दोनों कनेक्शन अलग-अलग परिवारों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं या नहीं। अगर जांच में यह पाया जाता है कि एक ही परिवार दो कनेक्शनों के जरिए सब्सिडी सीमा का अनुचित लाभ ले रहा है, तो उस पर नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अलग-अलग रह रहे परिवारों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

​खपत नियंत्रित करके उपभोक्ता दोबारा पा सकेंगे राहत

​बिजली अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था खपत आधारित है और इसमें कोई स्थायी बदलाव नहीं हुआ है। जैसे ही मौसम सामान्य होगा और उपकरणों का उपयोग कम होगा, मीटर की रीडिंग अपने आप कम हो जाएगी। खपत के 100 या 150 यूनिट के भीतर आते ही सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद उपभोक्ता को छूट की श्रेणी में जोड़ देगा। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक बिजली की खपत पर अंकुश लगाएं ताकि उनका बिल बजट के अंदर रहे। दो मीटर के दुरुपयोग पर निगरानी बढ़ाकर कंपनी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि योजना का लाभ केवल पात्र और पारदर्शी उपभोक्ताओं तक ही सीमित रहे।

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