बताया गया है कि शाम 6 बजे के लगभग छात्राएं एक कमरे में बैठकर सामूहिक रुप से पढ़ाई कर रही थी। एक दूसरे से सभी विषयों पर चर्चा कर रही छात्राओं पर अचानक प्लास्टर भरभराकर गिर गया, जिससे छात्राओं को चोट आई, वे चीखपुकार मचाते हुए अपनी जान बचाने के लिए कमरे से बाहर निकलकर आ गई। शोर सुनकर हॉस्टल के अन्य कमरों में पढ़ाई कररही अन्य छात्राएं भी बाहर आ गई। इस बीच वार्डन सहित अन्य कर्मचारियों ने छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया। वहीं घटना की खबर मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। गौरतलब है कि हॉस्टल की बिल्डिंग की खस्ता हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां प्लास्टर गिरने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी दो बार छत का प्लास्टर गिर चुका है, लेकिन राहत की बात यह थी कि उन दोनों समय स्कूल बंद था।
जर्जर कमरों के इस्तेमाल पर रोक-
हादसे के बाद पटेरा तहसीलदार उमेश तिवारी ने बताया कि घायल छात्राओं को बेहतर इलाज देने की पूरी कोशिश की जा रही है। वहीं, पटेरा के बीआरसी मुकेश गुजरे ने इस पूरी लापरवाही की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने पटेरा ब्लॉक में चलने वाले सभी सरकारी स्कूलों और हॉस्टलों से उनकी बिल्डिंग की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही सभी प्रभारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी जर्जर या कमजोर कमरे में बच्चों को बिल्कुल न बैठाया जाए।
छात्रावास की वार्डन सस्पेंड-
छात्रावास की वार्डन सीता स्वामी तिवारी प्राथमिक शिक्षक को जिला पंचायत सीईओ ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश में लिखा है कि 3 जून 2026 को आदेश जारी किया गया था, जिसमें बताया गया था कि जिन छात्रावास और स्कूल की छत जर्जर है, उनमें बच्चों को न बैठाया जाए। इसके बावजूद भी घटना हुई है। मामले में जांच कराए जाने पर वार्डन को दोषी माना गया है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
इन छात्राओं को आई है चोट-
ज्योति पिता अनरव सिंह उम्र 10 वर्ष
-काजल पिता देवेंद्र अहीरवाल 12 वर्ष,
-बबली पिता प्रकाश पटेल 12 वर्ष,
-लक्ष्मी पिता लीला बर्मन 12 वर्ष,
-रश्मि पिता कल्याण आदिवासी 12 वर्ष,
-अनामिका (11 वर्ष, पिता राघवन)
-लक्ष्मी पिता वेजू अहिरवार 11 वर्ष,
-शिक्षा पिता राम प्रसाद 10 वर्ष,