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अतिक्रमण की भेंट चढ़े शहर के 80 प्रतिशत तालाब, ननि से लगायी बचाव की गुहार



जबलपुर। शहर में तेजी से घटते जलाशयों के दायरे ने आम लोगों के साथ प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम के अधिकारियों से मिलकर इन तालाबों की बदहाली पर कड़ा रुख अपनाया है। शहर के सुरजताल, रानीताल, महानद्दा, गंगासागर, गोकलपुर, बालसागर, माढ़ोताल, तेवर तालाब, सगड़ा तालाब, रामनगरा, गौरवताल, ककराही तलैया, कंचनपुर तालाब, बकसेरा तालाब, बघाताल और जिन्दहाई तलैया पर चारों तरफ से अवैध अतिक्रमण का कब्जा हो चुका है। इससे करीब 80 प्रतिशत तालाबों की मूल सरहद अब पूरी तरह मिट चुकी है। इन जलस्रोतों के कैचमेंट एरिया में लगातार हो रहे निर्माण कार्यों ने जल भराव की स्थिति को बहुत अधिक गंभीर बना दिया है। मंच के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इन तालाबों को बचाने के लिए ठोस कार्यवाही शुरू की जाए।

​जल्द ही समिति बनाकर तालाबों की जांच होगी

​नगर निगम के अधिकारियों के साथ हुई विस्तृत चर्चा के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग के जागेन्द्र सिंह ने बताया कि अब निगम एक विशेष समिति का गठन करेगा। यह टीम सभी तालाबों की बारीकी से जांच करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण को गिराने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। पूर्व कलेक्टर दीपक सक्सेना ने पूर्व में ही एसडीएम को सीमांकन करने और नगर निगम को अवैध निर्माण हटाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, लेकिन वह प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ी है। मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, पी.एस. राजपूत, घनश्याम सोनकर, सुशीला कनौजिया, अशोक यादव और अनिल गुप्ता ने चिंता जताई है कि शहर को पानी पिलाने वाले खंदारी एवं परियट जलाशय भी अब सुरक्षित नहीं हैं। इनके कैचमेंट एरिया में भी तेजी से निर्माण हो रहे हैं, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा हैं।

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