जबलपुर। जिले में स्टाम्प की कालाबाजारी और सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले 19 वेंडरों और सेवा प्रदाताओं पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प्स ने इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। वरिष्ठ जिला पंजीयक की टीम द्वारा सिहोरा, गोसलपुर और विजय नगर स्थित हाट बाजार में किए गए औचक निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। इसमें पाया गया कि स्टाम्प वेंडर निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर स्टाम्प बेच रहे थे और गलत मद का चयन कर दस्तावेजों में कम मुद्रांक शुल्क वसूल कर रहे थे। नोटिस पाने वालों में जगदीश प्रसाद पाठक, ब्रिजेश कुमार उपाध्याय, सुनील खरे, संजय कुमार गुप्ता, गणेश प्रसाद, नीतू साहू, कविता तिवारी, मनीष जैन, पूर्णेश जैन, ओ पी मिश्रा, उभी मिश्रा, प्राची शर्मा, योगिता चावला, किरण प्यासी, शबा आफरीन, सुशील पाण्डेय, विनय कुमार पाण्डेय, शिवांक तिवारी और एजाज अंसारी शामिल हैं।
सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली बड़ी धांधली
जांच टीमों ने पाया कि शपथ-पत्र जैसे दस्तावेजों के लिए 200 रुपये का स्टाम्प अनिवार्य होने के बावजूद वेंडर महज 50 या 100 रुपये का स्टाम्प इस्तेमाल कर रहे थे। इसके अलावा अचल संपत्ति के अनुबंध-पत्र, किरायानामा और सहमति-पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी गलत हेड में तैयार कर केवल 1,000 रुपये या उससे कम के स्टाम्प पर निपटाया जा रहा था। टीमों ने वेंडरों के रजिस्टरों की जांच कर साक्ष्य भी जुटाए हैं। यह सीधे तौर पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 और मध्यप्रदेश स्टाम्प नियम 1942 के नियम 27 का उल्लंघन है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इन वेंडरों के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द या निलंबित कर दिया जाएगा। यह कार्रवाई अन्य वेंडरों के लिए भी चेतावनी है।
नियम विरुद्ध कार्य करने वालों पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने जिले के सभी दस्तावेज लेखकों और सेवा प्रदाताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे भविष्य में शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही स्टाम्प बेचें। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान को पूरी तरह रोका जा सके। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे भी निर्धारित दर पर ही स्टाम्प खरीदें और किसी भी वेंडर द्वारा अधिक राशि मांगने पर इसकी शिकायत तुरंत जिला पंजीयक कार्यालय में करें। प्रशासन की इस मुहिम से अब स्टाम्प विक्रय प्रक्रिया में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
