जबलपुर। जबलपुर कलेक्ट्रेट कार्यालय में सहायक ग्रेड 2 से 3 और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की बहुप्रतीक्षित पदोन्नति सूची गुरुवार की शाम जारी होने के बाद से माहौल पूरी तरह बदल गया है। इस नई सूची के माध्यम से कुल 114 कर्मचारियों को पदोन्नति का सीधा लाभ मिला है, जिससे उनके घरों में खुशी की लहर दौड़ गई है। आदेश सामने आते ही कलेक्ट्रेट परिसर में मिला-जुला माहौल देखने को मिला, जहां एक तरफ चयनित कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे, वहीं दूसरी तरफ दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों में गहरी मायूसी छा गई। पदोन्नति से वंचित रहे इन कर्मियों का मुख्य आरोप यह है कि उनकी सेवा अवधि 20 से 25 साल पूरी हो चुकी है, इसके बावजूद उन्हें इस लाभ से वंचित रखा गया, जबकि महज 5 से 10 साल की सेवा वाले कर्मचारी आगे बढ़ा दिए गए हैं। इस बीच, प्रशासनिक पक्ष रखते हुए एडीसी श्रीमती नीता राठौर ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई है और जिन लोगों को प्रमोशन नहीं मिला है, उनके दस्तावेजों या पात्रता में कुछ न कुछ तकनीकी कमियां अवश्य पाई गई हैं। राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले अन्य जिलों जैसे कटनी, मंडला और डिंडौरी में पहले ही पदोन्नति की सूचियां जारी की जा चुकी थीं, जिससे जबलपुर के स्थानीय कर्मचारियों में काफी समय से असंतोष पनप रहा था। कर्मचारियों का यह भी तर्क था कि समय पर सूची न आने के कारण वे संभाग स्तर पर पिछड़ जाएंगे। इसके अलावा, पदोन्नति की राह में एक बड़ी बाधा गोपनीय प्रतिवेदन यानी सीआर से जुड़ी रही। नियमों के मुताबिक सीआर तैयार कर उपलब्ध कराने की पूरी जिम्मेदारी स्थापना विभाग की होती है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों को खुद ही अपने सीआर के लिए इधर-उधर भटकना पड़ गया। स्थापना विभाग की इसी गंभीर लापरवाही के चलते कई पात्र कर्मचारियों को प्रमोशन की प्रक्रिया से बाहर होना पड़ गया है। एडीसी श्रीमती नीता राठौर के अनुसार जिन लोगों को प्रमोशन नहीं मिला है, या तो उनकी समय पर सीआर उपलब्ध नहीं हो पाई थी या फिर उन्होंने अनिवार्य सीपीसी परीक्षा पास नहीं की थी, अथवा परीक्षा में उनके अंक पात्रता के अनुसार पर्याप्त नहीं थे।
