जबलपुर। डूंड़ी में रानी अवंती बाई गौशाला के अंदर व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं, जिसके चलते बीते 6 दिनों में 6 गायों की असमय मौत हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों ने इस दर्दनाक घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि इस गौशाला में लंबे समय से गंभीर प्रशासनिक लापरवाही चल रही है, जिसके कारण मूक पशुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस बड़ी लापरवाही ने अब एक गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है।
गौशाला परिसर में पसरी गंदगी और भूख-प्यास का संकट
डूंड़ी की इस प्रमुख गौशाला के भीतर चारों तरफ अव्यवस्था का माहौल है। पशुओं के रहने वाले स्थानों पर लंबे समय से साफ-सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण वहां भारी गंदगी और कीचड़ जमा हो गया है। बारिश की शुरुआत के साथ ही जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इसके साथ ही पशुओं को खाने के लिए पर्याप्त और पौष्टिक चारा नसीब नहीं हो रहा है। पीने के लिए स्वच्छ पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे बेजुबान जानवर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं और लगातार कमजोर होकर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
बीमार पशुओं को नहीं मिल रहा समय पर इलाज
इस परिसर में रहने वाले बीमार गौवंश को समय पर आवश्यक चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल पा रही है। जब कोई गाय बीमार होती है, तो उसे अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग रखने या उसका तुरंत इलाज शुरू करने की कोई मुस्तैद व्यवस्था नहीं है। डॉक्टरों की टीम नियमित रूप से यहां का दौरा नहीं करती है। कई पशु गंभीर रूप से बीमार होकर तड़पते रहते हैं, लेकिन उन्हें प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं कराया जाता। यदि समय रहते इन बीमार पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच होती और उन्हें दवाइयां मिलतीं, तो इन 6 गायों की जान को आसानी से बचाया जा सकता था।
उग्र आंदोलन की चेतावनी और त्वरित सुधार की मांग
बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बाद भी जब जिम्मेदार अधिकारियों ने इस बदहाली पर कोई ध्यान नहीं दिया, तो अब स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों और गौसेवकों ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि तुरंत ही गौशाला की सूरत नहीं बदली गई, चारे-पानी का उचित प्रबंध नहीं हुआ और डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। गौसेवकों का कहना है कि जिस जगह का निर्माण गायों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए किया गया था, वही जगह अब उनकी मौत का कारण बन रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
