जबलपुर। गौर स्थित बलिदान स्थल पर आयोजित रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जमकर राजनीतिक हमले किए। सिंघार ने सत्तारूढ़ दल पर आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान को समाप्त करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए समान नागरिक संहिता और सिकल सेल बीमारी के बजट आवंटन पर गंभीर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने डुमना एयरपोर्ट का नामकरण रानी दुर्गावती के नाम पर करने में हो रही देरी को लेकर प्रदेश की डबल इंजन सरकार की नीयत को कठघरे में खड़ा किया और मुख्यमंत्री से केवल घोषणाएं करने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करने की मांग की।
आदिवासी पहचान और बजट आवंटन पर तीखा हमला
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सत्तापक्ष आदिवासी समाज को वनवासी हिंदू बनाने की लगातार कोशिश कर रहा है, जबकि इस समाज की अपनी एक अलग गौरवशाली परंपरा, समृद्ध संस्कृति और विशिष्ट धार्मिक मान्यताएं हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं संघ प्रमुख मान चुके हैं कि सनातन से पहले आदिवासी अस्तित्व में थे, इसलिए इस समाज की पृथक पहचान को हर हाल में स्वीकार किया जाना चाहिए। भाजपा आदिवासियों को समान नागरिक संहिता के दायरे में लाकर उनके अधिकारों को सीमित करना चाहती है और उनके साथ केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है। सिंघार ने केंद्र सरकार से सिकल सेल बीमारी के इलाज के लिए आने वाले भारी-भरकम बजट पर भी उंगली उठाई और कहा कि इस बड़ी राशि का लाभ आज तक धरातल पर जरूरतमंद मरीजों तक नहीं पहुंच पाया है।
हवाई अड्डे के नामकरण पर सरकार को घेरा
जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट का नाम बदलकर रानी दुर्गावती के नाम पर रखने की मांग का समर्थन करते हुए सिंघार ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के हालिया बयान पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और मध्य प्रदेश दोनों जगह भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली डबल इंजन सरकार चल रही है, तो इस निर्णय को लागू करने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है। मुख्यमंत्री को केवल लोकलुभावन घोषणाएं करने से बचना चाहिए और जनता को यह स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि हवाई अड्डे के मुख्य द्वार पर वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम का बोर्ड वास्तव में किस तारीख को लगाया जाएगा। ज्ञात हो कि चंदेल वंश के शासक कीरत राय की पुत्री रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को हुआ था और उन्होंने बचपन से ही युद्ध कलाओं में निपुणता हासिल कर ली थी। साल 1542 में उनका विवाह गोंडवाना के दलपत शाह से हुआ था और वे 1564 में दुश्मनों से मुकाबला करते हुए देश के लिए शहीद हो गई थीं।
