इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। हाल ही में जस्टिस सचदेवा को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इसके बाद मामले की सुनवाई नई बेंच कर रही है, जिसमें जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा शामिल हैं। नई बेंच ने तय किया है कि 15 जुलाई से ओबीसी आरक्षण मामले में सभी पक्षों की अंतिम सुनवाई की जाएगी। यह फाइनल हियरिंग डे-टू-डे आधार पर होगी। इसके बाद अदालत द्वारा यथाशीघ्र फैसला सुनाए जाने की संभावना है। मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण का मामला पिछले सात वर्षों से कानूनी प्रक्रिया में उलझा हुआ है। वर्ष 2019 में ओबीसी आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी किए जाने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ओबीसी आरक्षण बढऩे से प्रदेश में कुल आरक्षण 6& फीसदी हो गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित मानकों के अनुसार आरक्षण 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। तब से यह मामला अदालत में लंबित है। अब 15 जुलाई से रोजाना सुनवाई तय होने के बाद इस बहुप्रतीक्षित मामले में जल्द फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है।
जबलपुर। एमपी में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टल गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अब अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की है। अदालत ने यह भी तय किया है कि 15 जुलाई से मामले की रोजाना सुनवाई की जाएगी।
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