जबलपुर। मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन ने मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को एक ज्ञापन प्रेषित कर मांग की है कि प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं शासकीय डिस्पेंसरियों में वितरित की जाने वाली प्रत्येक दवा के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला द्वारा जारी क्वालिटी कंट्रोल प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जाए।
संगठन के अध्यक्ष डॉ अजय वाधवानी ने बताया कि समय-समय पर जांच रिपोर्टों में यह सामने आता है कि सरकारी आपूर्ति की कुछ दवाइयां गुणवत्ता परीक्षण में असफल पाई जाती हैं। ऐसी स्थिति रोगियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इससे आम नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास भी प्रभावित होता है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि प्रत्येक दवा का बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि एवं गुणवत्ता परीक्षण प्रमाणपत्र संबंधित अस्पताल में उपलब्ध रखा जाए। आवश्यकता पड़ने पर नागरिकों को इसकी जानकारी प्राप्त हो सके। यदि गुणवत्ता प्रमाणपत्र जारी होने के बाद भी कोई दवा दोषपूर्ण पाई जाती है तो संबंधित गुणवत्ता परीक्षण एजेंसी का पंजीकरण तत्काल निरस्त किया जाए। दोषी संस्था पर दवा आपूर्ति के कुल मूल्य का कम से कम दस गुना आर्थिक दंड लगाया जाए।
संगठन ने यह भी मांग की है कि दोषी दवा निर्माता, आपूर्तिकर्ता एवं गुणवत्ता परीक्षण एजेंसियों को भविष्य की शासकीय निविदाओं से निर्धारित अवधि तक प्रतिबंधित किया जाए। इसके अतिरिक्त सभी शासकीय अस्पतालों में दवाइयों की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट एवं परीक्षण अभिलेखों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
मौके पर संगठन के डॉ अमित सिसोदिया, भावना निगम, आशीष त्रिपाठी, आशुतोष चतुर्वेदी, डॉ कमल विश्वास, डॉ आशीष डेंगरा, डॉ प्रियांशु दीक्षित, डॉ अशोक मेथवानी, रोशन मंध्यानी, डॉ श्रीकांत साहू उपस्थित रहे।
