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हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के प्रभारी चीफ इंजीनियर का प्रभार आदेश रद्द किया



दागी अधिकारी को जिम्मेदारी देने पर अदालत ने जताई आपत्ति, साफ-सुथरे रिकॉर्ड वाले को कमान देने के निर्देश

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भोपाल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ब्रिज जोन के चीफ इंजीनियर का प्रभार संजय कुमार मस्के को सौंपे जाने के सरकारी आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस कार्यालय को संबंधित अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट यानी आरोप पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, उसी कार्यालय की कमान उस अधिकारी को सौंप दी गई है, जो प्रशासनिक नियमों के खिलाफ है।

नियुक्ति में सेवा रिकॉर्ड का ध्यान रखा जाए

​उच्च न्यायालय ने पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव को सख्त निर्देश दिए हैं कि भोपाल ब्रिज जोन के चीफ इंजीनियर का प्रभार केवल ऐसे अधिकारी को दिया जाए जिसका सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ-सुथरा हो और जो पदोन्नति की पात्रता श्रेणी में आता हो। यह पूरी कानूनी लड़ाई भोपाल पीडब्ल्यूडी के प्रभारी चीफ इंजीनियर पीसी वर्मा की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आई। याचिकाकर्ता पीसी वर्मा ने अदालत को बताया कि उन्हें जुलाई 2025 में भोपाल पीडब्ल्यूडी ब्रिज जोन के चीफ इंजीनियर का प्रभार दिया गया था, लेकिन इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को उन्हें अचानक इस पद से हटा दिया गया। उनकी जगह यह जिम्मेदारी संजय कुमार मस्के को दे दी गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि संजय कुमार मस्के के खिलाफ सिवनी में बैनगंगा नदी पर बने सबमर्शिबल पुल के ढहने और ग्वालियर में एक हजार बिस्तर के अस्पताल के निर्माण में 2.41 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता की गंभीर जांच चल रही है। अदालत ने इन तथ्यों को सही पाते हुए प्रभार सौंपने के आदेश को खारिज कर दिया।

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