मुंबई. पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में चिंता का माहौल था. लेकिन शुक्रवार को तस्वीर बदलती नजर आई. ईरान की सरकारी एजेंसी से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच प्रस्तावित समझौते में कई अहम मुद्दों पर सहमति बन सकती है.
इसमें प्रतिबंधों को हटाने, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने और इलाके से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करने जैसे बिंदु शामिल बताए गए. इन खबरों ने निवेशकों की घबराहट कम की और बाजार में खरीदारी बढ़ गई. नतीजतन सेंसेक्स 75,500 के ऊपर पहुंच गया और निफ्टी ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की. सेंसेक्स ने जहां 1695 अंकों की उछाल मारी, वहीं निफ्टी 461 प्वाइंट्स से अधिक तेजी के साथ बंद हुआ.
ट्रंप के बयान से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
बाजार की तेजी के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी रहा. ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के साथ जंग खत्म करने की दिशा में समेझौता लगभग तैयार है और सप्ताहांत तक इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त कर दिया है और परमाणु हथियारों को लेकर अपनी प्रमुख शर्त पर सहमति हासिल कर ली है. इस बयान के बाद वैश्विक निवेशकों ने राहत की सांस ली. जब किसी बड़े भू-राजनीतिक संकट के खत्म होने की संभावना बनती है, तो शेयर बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ती है. यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी निवेशकों ने जमकर खरीदारी की.
कच्चे तेल की गिरती कीमतें बनीं सबसे बड़ा सहारा
भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट हमेशा राहत लेकर आती है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड लगभग 5 प्रतिशत गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. यह पिछले दो महीनों के निचले स्तरों के करीब माना जा रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल सस्ता होने से आयात बिल कम होता है. इससे व्यापार घाटा और महंगाई पर दबाव घटता है. यही कारण है कि तेल की कीमतों में नरमी को बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया. इसका सबसे ज्यादा फायदा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइन कंपनियों और उन उद्योगों को मिला जिनकी लागत ईंधन पर काफी निर्भर करती है.
सभी शेयरों में खरीदारी, निवेशकों की संपत्ति बढ़ी
शुक्रवार की तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही. बाजार के सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक हरे निशान में बंद हुए. निफ्टी स्मॉलकैप 100 और मिडकैप 100 सूचकांकों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई. बीपीसीएल, एचपीसीएल और इंडियन ऑयल जैसे तेल कंपनियों के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक तेजी रही. वहीं एयरलाइन कंपनी इंडिगो को भी सस्ते ईंधन का फायदा मिलने की उम्मीद में निवेशकों ने खरीदा. पेंट, टायर और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में भी मजबूती दिखाई दी. इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो में भी अच्छी खरीदारी हुई. कुल मिलाकर बाजार में यह संदेश गया कि यदि भू-राजनीतिक तनाव और कम होता है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो आने वाले दिनों में निवेशकों का उत्साह और बढ़ सकता है.
