ओडिशा से जबलपुर ट्रांसफर हुआ था मामला
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में जेएमएफसी कोर्ट में जमा 1.50 लाख रुपए की कोर्ट फीस को याचिकाकर्ता को वापस लौटाने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि किसी भी पक्षकार पर न्यायिक प्रक्रिया के कारण बेवजह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। इस मामले के तथ्यों के अनुसार, एक पक्षकार द्वारा शुरुआत में ओडिशा की अदालत में एक मुकदमा दायर किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक कानूनी दृष्टांत और आदेश के तहत इस मामले को जबलपुर की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। जब मामला जबलपुर आया, तो यहां सुनवाई के लिए जेएमएफसी कोर्ट में 1.50 लाख रुपए की कोर्ट फीस जमा कराई गई थी। हालांकि, कानूनी पेचीदगियों और सुनवाई के दौरान यह मामला एक बार फिर से वापस ओडिशा न्यायालय में भेज दिया गया। मामला तो ओडिशा चला गया, लेकिन पक्षकार द्वारा जबलपुर में जमा की गई कोर्ट फीस यहीं फंसी रह गई। इस पर आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद एकल पीठ ने फंसी हुई कोर्ट फीस वापस करने का फैसला सुनाया।
