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शासकीय वकीलों की नियुक्ति मामले में सरकार को अंतिम मौका



महाधिवक्ता कार्यालय में 157 लॉ ऑफिसर्स की भर्ती को दी गई है चुनौती

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और एजी ऑफिस को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए आखिरी मोहलत प्रदान की है। जस्टिस एमएस भट्टी और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ ने इस गंभीर मामले पर अगली सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख तय की है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के संयुक्त सचिव योगेश सोनी द्वारा दायर की गई इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाधिवक्ता कार्यालय में तय नियमों को दरकिनार करके ऐसे वकीलों को सरकारी पक्ष रखने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है जो इसके लिए अनिवार्य योग्यताएं पूरी नहीं करते हैं। विवाद की शुरुआत 25 दिसंबर को जारी हुई उस सूची से हुई जिसके तहत महाधिवक्ता कार्यालय में कुल 157 लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति की घोषणा की गई थी। याचिकाकर्ता का साफ कहना है कि चयन की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से मनमानी, अपारदर्शी और भाई-भतीजावाद से प्रेरित है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने दलील दी कि इन विधि अधिकारियों का सेवा कार्यकाल केवल 1 वर्ष का निर्धारित है, लेकिन इसके बावजूद शासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। याचिका में इस बात का भी उल्लेख है कि वर्ष 2013 के राजपत्र में शासकीय वकीलों की नियुक्ति के लिए कम से कम 10 वर्ष की वकालत का अनुभव होना अनिवार्य किया गया था, परंतु वर्तमान सूची में कई ऐसे चेहरे शामिल हैं जिनकी प्रैक्टिस की अवधि 10 साल से बहुत कम है।

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