जबलपुर। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों और सहायक शिक्षकों को शासन की घोषणा के बावजूद चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिलने में देरी हो रही है। राज्य सरकार ने 35 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले शैक्षणिक संवर्ग के लिए 01.07.2023 से इस लाभ की स्वीकृति दी थी। आदेश जारी हुए करीब 2 माह बीत चुके हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर अधिकारियों द्वारा अब तक प्रकरण स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारियों को नहीं भेजे गए हैं। इससे हजारों कर्मचारी आर्थिक लाभ से वंचित हैं।
देरी से बढ़ेगी एरियर और वित्तीय मुश्किलें
कर्मचारी संगठन के अटल उपाध्याय के अनुसार क्रमोन्नति का लाभ मिलने पर वेतन में प्रति माह 2000 से 5000 रुपये तक की वृद्धि होगी। इसके लिए 5 वर्षों की गोपनीय चरित्रावली और सेवा पुस्तिका जैसे दस्तावेजों की स्क्रूटनी आवश्यक है। संकुल प्राचार्यों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा फाइलों को आगे न बढ़ाने से देरी हो रही है। सहायक शिक्षकों को 15600-39100 + 5400 ग्रेड पे और शिक्षकों को 7600 ग्रेड पे के साथ सातवें वेतनमान के एल-12 और एल-14 स्तर का लाभ मिलना है। देरी होने पर एरियर भुगतान में भी जटिलताएं आएंगी। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने स्पष्ट किया कि समय पर कार्रवाई न होने से कर्मचारियों को कोषालय स्तर पर भी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मांग करने वालों में अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, नरेश शुक्ला, प्रशांत सौंधिया, राजा राम डेहरिया, अर्जुन सोमवंशी, सुशील गुप्ता, एस पी बाथरे, बृजेश मिश्रा, पंकज दुबे, अजीत वर्मा, योगेश देशमुख और अरुण पटेल शामिल हैं।
