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पुलिस कस्टडी में संदिग्ध मौतों पर अदालत सख्त, थानों के सीसीटीवी सुरक्षित रखने के निर्देश



जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने छतरपुर जिले के विभिन्न थानों में मात्र 2 महीने के भीतर 4 हवालातियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष दीक्षित द्वारा दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश विवेक जैन और न्यायाधीश अजय कुमार निरंकारी ने सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में मध्यप्रदेश शासन, पुलिस महानिदेशक, सागर रेंज के आईजी, छतरपुर एसपी तथा राजनगर, चांदला और गौरीहार के थाना प्रभारियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब तलब किया है। इसके साथ ही न्यायालय ने संबंधित थानों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं, ताकि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो सके। इस गंभीर प्रकरण की अगली सुनवाई अब 14 जुलाई को तय की गई है।

​हवालात के सुरक्षा दावों पर उठे गंभीर सवाल

​याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और अधिवक्ता जितेंद्र कुमार दीक्षित ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि मृतकों के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं, जो पुलिस की प्रताड़ना की ओर इशारा करते हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा हर मामले में यह तर्क दिया जा रहा है कि आरोपियों ने जहर खाकर या फांसी लगाकर आत्महत्या की है। इस पर याचिका में सवाल उठाया गया कि पुलिस अभिरक्षा और हवालात जैसी सुरक्षित जगहों पर बंद आरोपियों के पास जहर या फांसी लगाने की सामग्री आखिर कैसे पहुंच सकती है।

​दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

​सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने पैरवी करते हुए अदालत को सूचित किया कि इन 4 मामलों में से 2 मामलों में न्यायिक जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे घटनाक्रम की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से कराई जाए। साथ ही जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और थानों के सीसीटीवी फुटेज व कॉल डिटेल रिकॉर्ड को तुरंत जब्त किया जाए।

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