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ट्रांसको की तत्परता से टला बड़ा हादसा, बिजली लाइन के पास से हटाया अवैध निर्माण



जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने दमोह में एक बड़ी दुर्घटना को रोक दिया है। 220 केवी दमोह-टीकमगढ़ ट्रांसमिशन लाइन में अचानक ट्रिपिंग की समस्या आ रही थी। खराबी की असली वजह तलाशने के लिए विभाग ने एक विशेष पेट्रोलिंग अभियान चलाया। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दमोह स्थित जबलपुर नाका क्षेत्र में एक मकान मालिक अपनी छत पर बाउंड्री और छज्जे का निर्माण कर रहा था। यह नया निर्माण बिजली की हाई वोल्टेज लाइन के प्रतिबंधित सुरक्षा कारीडोर के बेहद पास पहुंच गया था। इसी वजह से लाइन बार-बार ट्रिप हो रही थी और करंट फैलने का बड़ा खतरा बना हुआ था।

​टीम ने समझाइश देकर हटवाया खतरनाक निर्माण

​कार्यपालन अभियंता एसके मुड़ा के मार्गदर्शन में बिजली विभाग की एक विशेष टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मकान मालिक को बिजली के सुरक्षा नियमों और हाई वोल्टेज लाइन से होने वाले खतरों के बारे में विस्तार से समझाया। समझाइश के बाद मकान मालिक अपनी गलती सुधारने के लिए तैयार हो गया। उसकी सहमति से निर्माण के उस खतरनाक हिस्से को तुरंत तोड़कर हटा दिया गया जो बिजली लाइन के करीब था। इस कार्रवाई के बाद ट्रांसमिशन लाइन को सुरक्षित दूरी मिल गई और एक बहुत बड़ा संभावित हादसा समय रहते टल गया।

​शहर में 15 निर्माण चिन्हित, नोटिस जारी

​एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरविंद शर्मा ने बताया कि दमोह शहर के भीतर व्यापक जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस सर्वे में अब तक लगभग 15 ऐसे मकान और निर्माण कार्य चिन्हित किए गए हैं, जो ट्रांसमिशन लाइन के प्रतिबंधित दायरे का उल्लंघन कर रहे हैं। विभाग ने इन सभी संबंधित मकान मालिकों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए हैं। इन सभी को अपने अवैध और खतरनाक निर्माण को तुरंत हटाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो और जान-माल का नुकसान न हो।

​सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील

​इस संवेदनशील मामले को देखते हुए ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने आम नागरिकों से अपील की है। उन्होंने कहा है कि लोग ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास किसी भी तरह का निर्माण कार्य करने से बचें। नियमों के अनुसार 132 केवी लाइन के दोनों तरफ 27 मीटर और 220 केवी लाइन के लिए 35 मीटर का सुरक्षा कारीडोर तय किया गया है। इस दायरे के भीतर किसी भी तरह का निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी है। इन बड़ी लाइनों की विद्युत क्षमता घरेलू बिजली के मुकाबले 600 से 950 गुना ज्यादा खतरनाक होती है, इसलिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना बेहद जरूरी है

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