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अपडेट, 8 से 10 लाख रुपए में तीनों डाक्टरों ने खरीदी थी MBBS की फर्जी डिग्री, जबलपुर, दमोह में कर रहे थे इलाज

 

जबलपुर/दमोह। जबलपुर व दमोह में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी आरोग्य केंद्र दमोह व संजीवनी क्लिनिक जबलपुर में काम कर रहे तीन फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं। इनके पास मिली एमबीबीएस डिग्री व मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का रजिस्ट्रेशन फर्जी निकला। आरोपियों ने 8 से 10 लाख रुपए में फर्जी डिग्री खरीदी थी।

                                  पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में डॉक्टर  कुमार सचिन यादव निवासी ग्वालियर, डॉ. राजपाल गौर निवासी सीहोर व डॉ. अजय मौर्य निवासी मुरैना शामिल हैं। अजय फिलहाल जबलपुर में रह रहा था। जांच में उसके पास भी एमबीबीएस की फर्जी डिग्री मिली है। पुलिस के मुताबिक, सचिन यादव और राजपाल गौर दमोह के सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक में काम कर रहे थे। वहीं अजय मौर्य जबलपुर में पिछले ढाई साल से संजीवनी अस्पताल में डॉक्टर के रूप में काम कर रहा था। तीनों के पास एमबीबीएस की फर्जी डिग्री मिली है। फर्जी डिग्री मामले में जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम भी सामने आ रहा है। एसपी ने बताया कि आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम भेजी गई है। फर्जी डिग्री तैयार करने वाले असली सरगना को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं।

भोपाल को नियुक्ति रद्द करने लिखा पत्र-

दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने बताया कि दोनों फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से हुई थी। जांच में उनकी एमबीबीएस डिग्री नकली पाई गई, इसलिए भोपाल स्थित कार्यालय को नियुक्ति निरस्त करने के लिए पत्र लिखा गया है। नियुक्ति रद्द करने का अधिकार हृ॥रू भोपाल के पास है।

बीडीएस, बीएचएमएस की डिग्री मिली-

जांच में सामने आया कि डॉ. सचिन यादव के पास बीडीएस की असली डिग्री है। वह करीब पांच महीने पहले संजीवनी क्लिनिक में नियुक्त हुआ था। वहीं राजपाल गौर करीब एक साल से काम कर रहा था। उसके पास बीएचएमएस की डिग्री मिली है। हालांकि, दोनों के पास एमबीबीएस की डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का वैध रजिस्ट्रेशन नहीं था। आरोप है कि दोनों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में नौकरी हासिल की।

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