जबलपुर/कोटा। रेलवे में 30 हजार पदों को समाप्त करने के प्रशासनिक निर्णय के खिलाफ रेल कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। इस फैसले के विरोध में पश्चिम-मध्य रेलवे कर्मचारी परिषद द्वारा एक राष्ट्रव्यापी विरोध पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत कर्मचारी संगठन ने रेलवे प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
15 से 29 मई तक जागरूकता अभियान
कर्मचारी परिषद द्वारा चलाया जा रहा यह विरोध पखवाड़ा 15 मई से शुरू हो गया है, 29 मई तक चलेगा। इस अभियान के तहत कोटा रेल मंडल सहित सभी प्रमुख कार्यस्थलों पर पोस्टर और पंपलेट लगाकर रेलकर्मियों को जागरूक किया जा रहा है और इस फैसले के खिलाफ एकजुट होने की अपील की जा रही है।
आंदोलन की आगामी रणनीति
कर्मचारी परिषद ने रेलवे प्रशासन को घेरने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की है,
जिसमें 22 मई (काला बैज और धरना)- इस दिन सभी कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान काला बैज लगाकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही कोटा में डीआरएम कार्यालय और वर्कशॉप कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
29 मई (महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव): पखवाड़े के अंतिम दिन 29 मई को पश्चिम-मध्य रेलवे के मुख्यालय (जबलपुर) में महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष एक विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारी संख्या में रेलकर्मी शामिल होंगे।
आदेश वापस नहीं लिया तो होगा बड़ा आंदोलन
पश्चिम-मध्य रेलवे कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि पदों को समाप्त करने का यह निर्णय पूरी तरह से कर्मचारी विरोधी है और इससे रेलवे के मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ अत्यधिक बढ़ जाएगा। परिषद ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि रेलवे ने अपने इस विवादित आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया, तो रेलकर्मी चक्का जाम और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
