जानकारी के अनुसार, जेरठ गांव निवासी दामोदर लोधी के घर में करीब 80 बोरी गेहूं रखा था। गेहूं में आठ दिन पहले कीड़े मारने की दवा डाली गई थी। परिवार उसी कमरे में रह रहा था, जहां गेहूं रखा था। एक दिन पहले सुबह दामोदर की 12 वर्षीय बेटी भावना और 7 वर्षीय भतीजे समीर की तबीयत बिगड़ गई। दोनों को उल्टियां होने लगीं। परिजन उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। दामोदर ने बताया कि गेहूं में डाली गई जहरीली दवा की गंध सूंघने से बच्चों की मौत हुई है। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों की तबीयत भी खराब होने लगी।
पहले छह लोग हुए बीमार, फिर बढ़ी संख्या-
दामोदर के छोटे भाई डोमन ने बताया कि उनकी पत्नी विनीता समेत परिवार के कई लोग बीमार हुए, जिन्हें दमोह के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में दामोदर और डोमन के एक-एक बच्चे की तबीयत भी बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। इस तरह एक ही परिवार के करीब 10 लोग जहरीली गंध की वजह से बीमार हुए।
गेहूं को घर से दूर खेत में रखवाया गया-
पथरिया तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी ने बताया कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम आज गांव पहुंची। जिस कमरे में गेहूं रखा था, वहां से गेहूं को निकालकर घर से करीब 3 किलोमीटर दूर खेत में रखवाया गया है, ताकि उसकी गंध बाहर निकल सके और आगे कोई बीमार न हो। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि गेहूं में तय मात्रा से ज्यादा जहरीली गोलियां डाली गई थीं। इसी वजह से जहरीली गंध फैली और बच्चे उसकी चपेट में आ गए।
गांव में लगाया स्वास्थ्य शिविर-
स्वास्थ्य विभाग ने घर के सभी सदस्यों के साथ आसपास रहने वाले लोगों की भी जांच की। लोगों को समझाइश दी गई कि गेहूं में जहरीली दवा का इस्तेमाल सावधानी से करें और तय मात्रा से ज्यादा दवा न डालें। परिवार को मास्क और सैनिटाइजर दिए गए हैं। उन्हें कुछ दिन तक मास्क लगाने और जिस कमरे में गेहूं रखा था, वहां नहीं जाने की सलाह दी गई है। कमरे में रखे कपड़ों को भी धूप में रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी तरह की जहरीली गंध बाकी न रहे।