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कुर्सी बचेगी या जाएगी, कांग्रेस के सौरव-संजय की धड़कनें तेज, दिल्ली की नजरें टेढ़ी

 


कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के तहत जबलपुर के अध्यक्षों की समीक्षा अगले सप्ताह, वामसी रेड्डी और हरीश चौधरी लेंगे रिपोर्ट

जबलपुर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में संगठन सृजन अभियान के जरिए नियुक्त किए गए 71 जिलाध्यक्षों के भविष्य का फैसला अगले सप्ताह होने जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में जबलपुर के नगर अध्यक्ष सौरव शर्मा और ग्रामीण अध्यक्ष संजय यादव के कामकाज की विशेष रूप से स्क्रूटनी की जाएगी। पिछले कुछ समय से इन दोनों पदाधिकारियों के विरुद्ध स्थानीय स्तर पर लगातार असंतोष के स्वर उभर रहे हैं। हालांकि दोनों ही नेता अपनी सक्रियता का दावा कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के सामने अपनी उपयोगिता प्रमाणित करनी होगी। दिल्ली से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि वामसी रेड्डी विशेष रूप से इस प्रक्रिया की मॉनिटरिंग के लिए भोपाल आ रहे हैं।

प्रदर्शन के आधार पर होगा जिलाध्यक्षों के भाग्य का फैसला

​प्रदेश संगठन की योजना के अनुसार जिलाध्यक्षों के कार्यों का पिछले 2 महीनों में 2 बार प्रारंभिक आकलन किया जा चुका है। आगामी समीक्षा बैठक को अंतिम और निर्णायक माना जा रहा है, जिसमें कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रभारियों पर गाज गिरना तय है। संगठन के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि जिन जिलों में गुटबाजी चरम पर है या जहां से शिकायतों का पुलिंदा प्रदेश मुख्यालय पहुंचा है, वहां नेतृत्व परिवर्तन किया जा सकता है। वामसी रेड्डी की भोपाल में मौजूदगी यह स्पष्ट संकेत दे रही है कि केंद्रीय हाईकमान इस बार संगठन की मजबूती को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।

चार दिवसीय बैठकों में संभागवार होगी जमीनी हकीकत की जांच

​प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी 15 से 18 अप्रैल तक लगातार 4 दिनों तक संभागवार समीक्षा बैठकों का संचालन करेंगे। पीसीसी मुख्यालय में होने वाली इन बैठकों में सभी जिलाध्यक्षों को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान संगठन निर्माण की प्रगति, क्षेत्रीय चुनौतियों और भविष्य की चुनावी रणनीति पर बिंदुवार चर्चा होगी। जबलपुर के परिप्रेक्ष्य में यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां का असंतुष्ट खेमा पिछले काफी समय से सौरव शर्मा और संजय यादव के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। अब यह देखना होगा कि इन शिकायतों का प्रभाव उनके राजनीतिक करियर पर क्या पड़ता है।

बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के लिए ब्लॉक अध्यक्षों का सम्मेलन

​संगठन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 17 अप्रैल को नवनियुक्त ब्लॉक अध्यक्षों का एक विशाल सम्मेलन बुलाया गया है। इस सम्मेलन में ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों को बूथ मैनेजमेंट और संगठन विस्तार की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसके साथ ही जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों और विधानसभा प्रभारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे। हाईकमान का मुख्य फोकस अब कागजी कमेटियों के स्थान पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करना है। जबलपुर कांग्रेस के भीतर मची खींचतान के बीच यह समीक्षा सप्ताह जिले की राजनीति में बड़े फेरबदल का आधार बन सकता है। यदि समीक्षा रिपोर्ट प्रतिकूल रहती है, तो संगठन के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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