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जबलपुर में बिजली चोरी के मामलों में मीटर रीडरों की भूमिका संदिग्ध, लापरवाहों पर गिरी गाज,देखें वीडियो

 








जबलपुर।  शहर में पिछले दिनों बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कनेक्शनों में बिजली चोरी के मामले सामने आए हैं। इस पूरे मामले की समीक्षा के दौरान यह बात खुलकर प्रकाश में आई है कि संबंधित क्षेत्रों में तैनात कुछ मीटर रीडर भी इस गड़बड़ी में शामिल हैं। कंपनी के बिजली लीड्स के माध्यम से मीटर रीडिंग में अनियमितता की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसने इस मिलीभगत की आशंका को और मजबूत कर दिया। जब बिजली कंपनी के अधिकारी जांच करने मौके पर पहुंचे, तो कई स्थानों पर भारी अनियमितताएं पाई गईं। चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ उपभोक्ताओं के परिसर में स्मार्ट मीटर सही तरीके से काम कर रहे थे, इसके बावजूद अकारण ही कुछ दिन पहले उनके मीटर बदल दिए गए। इस गंभीर मामले को देखते हुए जबलपुर शहर के अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा ने वृत्त कार्यालय में शहर के सभी संभागों के लगभग 150 मीटर रीडरों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली, जिसमें पांचों संभाग के कार्यपालन अभियंता और अन्य अधिकारी गूगल मीट के माध्यम से जुड़े। बैठक के दौरान पश्चिम संभाग के आईटी मैनेजर अशोक हरदाहा को मीटर रीडिंग की सही तरीके से समीक्षा नहीं करने पर नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही पूर्व संभाग के मीटर रीडर सुमित दुबे की शिकायत पर दो महीने तक कार्रवाई न करने वाले कनिष्ठ यंत्री वरुण दर्वे को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मई माह में कुल 6 मीटर रीडरों को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।

​बिजली चोरी की गोपनीय जानकारी देने के लिए मीटर रीडरों को मिला मौका

​अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा ने बैठक के दौरान सभी संभागों के मीटर रीडरों से आमने-सामने चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शहर के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर एम्ब्रायडरी, आलमारी कारखाने और ई-रिक्शा चार्जिंग में बिजली चोरी पकड़ी गई है। ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता कि क्षेत्र में काम करने वाले मीटर रीडरों को अपने इलाके में हो रही इतनी बड़ी चोरियों की भनक न हो। अधिकारियों ने सभी मीटर रीडरों को एक पर्ची दी और उस पर अपने क्षेत्र के बड़े बिजली चोरों के नाम लिखकर जमा करने को कहा। इसके साथ ही जिन्हें सबके सामने जानकारी देने में हिचक हो रही थी, उन्हें एक और अवसर दिया गया है। वे वृत्त कार्यालय में रखे गए विशेष बॉक्स में गुप्त रूप से शिकायत लिखकर डाल सकते हैं। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जानकारी देने वाले किसी भी मीटर रीडर का नाम उजागर नहीं किया जाएगा और उसे पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।

​5 साल से एक ही जगह जमे मीटर रीडर बदलेंगे, लापरवाहों पर होगी एफआईआर

​बैठक में बिजली कंपनी ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी कर ली है। अधिकारियों ने सभी कार्यपालन अभियंताओं से ऐसे मीटर रीडरों की विस्तृत जानकारी मांगी है जो पिछले 5 साल या उससे अधिक समय से एक ही क्षेत्र में कार्यरत हैं। इन सभी पुराने जमे हुए मीटर रीडरों को जल्द ही दूसरे क्षेत्रों या संभागों में ट्रांसफर किया जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि मई के महीने में ही लापरवाही और गड़बड़ी करने वाले 4 मीटर रीडरों को ब्लैकलिस्ट किया गया था, जबकि आज समीक्षा बैठक के दौरान 2 और मीटर रीडरों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। आने वाले दिनों में शहर के उन सभी इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा जहां लाइन लॉस यानी बिजली का नुकसान सबसे ज्यादा है। यदि इस जांच में किसी भी मीटर रीडर की मिलीभगत पाई जाती है, तो उसे नौकरी से हटाने के साथ-साथ मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

​कनिष्ठ यंत्री को कारण बताओ नोटिस, लापरवाही बर्दाश्त नहीं

​समीक्षा के दौरान पूर्व संभाग के मीटर रीडर सुमित दुबे ने अधिकारियों के सामने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ओमती, भरतीपुर और उड़िया मोहल्ला में लगभग 400 ऐसे उपभोक्ता हैं जो मीटर रीडिंग लेने से रोकते हैं और कर्मचारियों को काम नहीं करने देते। इस संबंध में उन्होंने बहुत पहले ही अपने संबंधित कनिष्ठ यंत्री वरुण दर्वे को पूरी जानकारी लिखित में दे दी थी। इसके बावजूद लगभग दो माह का समय बीत जाने के बाद भी कनिष्ठ यंत्री द्वारा इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस घोर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अधीक्षण अभियंता ने कनिष्ठ यंत्री वरुण दर्वे को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। बिजली विभाग ने सभी कर्मचारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अपने क्षेत्रों में हो रही चोरी की सूचना तुरंत सीनियर अधिकारियों को दें, अन्यथा जांच में दोषी पाए जाने पर सारी जिम्मेदारी उनकी खुद की होगी।

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